रजिदर कुमार, गुरदासपुर

पिछले लंबे समय से लटकती आ रही मांगों को लेकर माझा किसान किसान संघर्ष कमेटी ने वीरवार को शहर में रोष मार्च निकालते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। इसके बाद किसानों ने डीसी कार्यालय का घेराव किया। वहां पंजाब सरकार के नाम डीसी विपुल उज्जवल को मांग पत्र सौंपने के लिए जब किसान कार्यालय के अंदर घुसने लगे तो पुलिस ने दरवाजा बंद कर दिया और किसानों को बाहर ही रोक दिया गया। इसके बाद गुस्साए किसानों ने डीसी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अंदर घुसने का प्रयास किया। लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। किसानों ने करीब चार घंटे डीसी कार्यालय के सामने धरना दिया।

किसानों के रोष को देखते हुए एसडीएम सकत्तर सिंह बल्ल चार घंटे बाद किसानों से मांग पत्र लेने के लिए उनके पास पहुंचे। एसडीएम के आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को जल्द स्वीकार ना किया गया तो वे 20 नवंबर को शहर के मेन हाईवे को जाम करेंगे या फिर रेल रोको आंदोलन चलाएंगे। धरने का नेतृत्व कर रहे जिला प्रधान बलविदर सिंह राजू ने कहा कि पंजाब में कैप्टन सरकार को बने तीन वर्ष का समय होने जा रहा है, लेकिन इन तीन वर्षो में कैप्टन सरकार ने किसानों से किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया। किसानों से झूठे वादे करके सत्ता हासिल करने वाली कैप्टन सरकार जीतने के बाद किसानों के खिलाफ फैसले ले रही है। कैप्टन सरकार से दुखी होकर किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले लंबे समय से उनके गन्ने की बकाया राशि नहीं दी जा रही है। अब फिर से गन्ने का सीजन शुरू होने जा रहा है, लेकिन उन्हें अभी तक पूरी पेमेंट नहीं मिली है। इस मौके पर किसान कंवलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, गोपी नंबरदार, हरपाल सिंह, कुलदीप सिंह, मनजीत सिंह, हरपाल सिंह, बख्शीश सिंह, दिलेर सिंह, निशान सिंह, सुरजीत सिंह आदि उपस्थित थे। नेशनल हाईवे जाम करने और ट्रेन रोकने की दी धमकी

जिलाध्यक्ष बलविदर सिंह राजू ने कहा कि कई बार सरकार के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें मांगें जल्द स्वीकार कर लागू करने का आश्वासन दिया गया है। लेकिन हर बार उनके संघर्ष को ठंडा करने के बाद सरकार द्वारा उनकी मांगों को न तो स्वीकार किया जाता है और न ही उनकी कोई बात सुनी जाती है। अब वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक उनकी मांगों को स्वीकार कर लागू नहीं किया जाता। यदि मांगें स्वीकार नहीं की गई तो 20 नवंबर को उनकी ओर से गुरदासपुर शहर में नेशनल हाईवे जाम किया जाएगा या फिर गुरदासपुर में रेल रोकी जाएगी। उनके संगठन द्वारा बैठक करके विचार-विमर्श करने के बाद संघर्ष की रणनीति बनाई जाएगी।

बारिश में भी डटे रहे किसान

किसानों द्वारा सुबह 11 बजे डीसी कार्यालय का घेराव किया गया, जो दोपहर तीन बजे तक चला। 12 बजे के करीब अचानक बारिश शुरू हो गई। किसान बारिश में भी डटे रहे और धरना जारी रखा। बारिश धीमी गति से मात्र आधा घंटा ही चली। ये हैं मांगें

---15 नवंबर तक गन्ना मिल चालू की जाए।

-- किसानों की बकाया राशि मिलों की ओर से जारी की जाए।

-- नए गन्ने की आने वाली पेमेंट एक्ट के मुताबिक 14 दिन में किसानों के खातों में डाली जाए।

-- पंजाब के गन्ने का मूल्य हरियाणा के गन्ने के मूल्य के बराबर किया जाए। 40

झूठी है कैप्टन सरकार : सुखविंदर सिंह

किसान सुखविदर सिंह का कहना है कि पंजाब की कैप्टन सरकार झूठी सरकार है। लोगों से वादे करके सत्ता तो हासिल कर ली। अब वादों को पूरा नहीं कर रही। किसानों के खिलाफ फैसले लेकर कैप्टन सरकार किसानों को तबाह करने की रणनीति बन रहा है। इसको वे कभी भी सहन नहीं करेंगे। पंजाब सरकार के खिलाफ वह सड़कों पर उतरकर सरकार का विरोध करेंगे। 33

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष : बख्शीश सिंह

किसान बख्शीश सिंह का कहना है कि कई बार जिला अधिकारियों व सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा उनके संघर्ष को दबाने के लिए उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। लेकिन अब वे अपने संघर्ष को शांत नहीं करेंगे। उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों को स्वीकार करके लागू नहीं किया जाता।

Posted By: Jagran

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