अशोक शर्मा, फिरोजपुर : दिन-प्रतिदिन विकसित हो रहे समाज में पुराने रीति-रिवाजों पर बेशक नए रिवाज हावी हो रहे हैं। लेकिन अंतरजातीय विवाह का मामला सरकारी और सामाजिक स्तर पर कई दावों के उलट है। सरकार ने अन्य राज्यों की तर्ज पर सिविल अधिकारों की सुरक्षा कानून 1955 के अंतर्गत अंतरजातीय विवाह करवाने वाले जोड़ों को सम्मानित करने और 51 हजार रुपये की राशि देने की योजना बनाई थी। यह योजना भी अन्य योजनाओं की तरह सरकार के खाली खजाने की भेंट चढ़ी हुई है। पंजाब में करीब 2700 जोड़ों को सरकारी सम्मान नसीब नहीं हुआ। इसके लिए किसी भी जत्थेबंदी या समाजसेवी संगठन ने भी आवाज नहीं उठाई।

फिरोजपुर और जालंधर के विवाहित जोड़ों ने पंजाब के अन्य हिस्सों के मुकाबले सबसे अधिक अर्जियां दी हैं। जालंधर की 368 और फिरोजपुर जिले की करीब 67 अर्जियों पर सरकार ने राशि जारी नहीं की। अन्य जिलों की अर्जियां मिलाकर 2700 से अधिक जोड़ों को सरकारी सम्मान व सहायता का इंतजार है। 2011-12, 2012-13 और 2013-14 में कोई भी रकम जारी नहीं की गई। 2014-15 में 461 करोड़ रुपये जारी हुए, लेकिन संबंधित विभाग ने बहुत मुश्किल से 113 करोड़ रुपये ही बांटे। इसमें से फिरोजपुर के 38 जोड़ों को 19.50 लाख रुपये की राशि बांटी गई और इसके बाद कोई राशि नहीं बांटी गई।

सामाजिक स्तर पर भी अंतरजातीय विवाह की नहीं स्वीकृति : मन्नु शर्मा

एंटी क्राइम पंजाब के प्रधान मन्नु शर्मा ने कहा कि बेशक पंजाब के लोगों का रहन-सहन और जीवन स्तर अन्य विकसित राज्यों और देशों की तरह लगातार ऊपर उठ रहा है। लेकिन पंजाबी अंतरजातीय विवाह को मान्यता नहीं देते। बहुत से परिवारों में अभी भी स्थिति यह बनी हुई है कि यदि उनकी लड़की या फिर लड़का अपनी पसंद का जीवन साथी चुनकर उससे शादी करवाने की इच्छा जाहिर करता है तो उसे मां-बाप बदनामी समझते हैं।

अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ा पंजाब : रविंद्रपाल सिंह

जिला लोक भलाई अफसर रविद्रपाल सिंह ने बताया कि बेशक हरियाणा में अंतरजातीय विवाह करवाने वाले जोड़ों को वहां से खास भाईचारे के लोग मारने तक से भी गुरेज नहीं करते। बावजूद इसके हरियाणा सरकार ने ऐसे जोड़ों को सम्मान देने के मामले में पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। यहां तक कि तमिलनाडू ऐसा राज्य है, जहां जात-पात से ऊपर उठकर विवाह करवाने वालों को सरकारी नौकरियां भी दी जाती हैं। महाराष्ट्र में भी ऐसे जोड़ों के लिए विशेष सम्मान का प्रबंध है। लेकिन पंजाब की स्थिति यह बनी हुई है कि यहां सरकार ने 51 हजार रुपये देने की योजना तो बना दी। लेकिन इसके तहत पिछले पांच सालों से ऐसे जोड़ों को सरकारी खजाने से एक भी पैसा जारी नहीं किया।

Posted By: Jagran

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