संवाद सूत्र, फिरोजपुर : सरकारी डाक्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल का पता चलते ही सिविल अस्पताल में भर्ती मरीज भी वार्ड छोड़कर घर लौटने लगे हैं। मरीजों का कहना है कि तीन दिन तक उनको डाक्टर देखने नहीं आने वाला तो वे भी वार्ड में रह कर क्या करेंगे। एनपीए में कटौती के विरोध में सोमवार से जिले के 76 सरकारी डाक्टरों ने हड़ताल शुरू की है।

रेडियोग्राफर, नर्सिंग और हेल्थ वर्कर्स की हड़ताल के कारण पिछले सप्ताह सेहत सुविधाएं न के बराबर रही। अब तीन दिन तक सरकारी डाक्टर्स की हड़ताल रहेगी। हालांकि कुछ इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। हड़ताल के कारण सोमवार को किसी भी मरीज का आपरेशन नहीं हुआ। यहां तक कि चार मरीजों को पलस्टर तक नहीं किया गया। हड़ताल के कारण ओपीडी बंद रहने से रोजाना आने वाले करीबन 450 के करीब मरीज अस्पताल से बिना जांच के ही लौट गए। पीसीएमएस के जिला प्रधान डा. जतिदर कोछड़ ने कहा एनपीए के मुद्दे पर सरकार डाक्टर्स से बात नहीं कर रही। पहले सांकेतिक हड़ताल की थी, अब डाक्टर संघर्ष को तीखा करने के मूड में है। सरकार डाक्टर्स की बातों पर गौर नहीं कर रही।

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मरीज बोले-अब हड़ताल के बाद ही आएंगे अस्पताल

सरकारी अस्पताल के जज्जा बच्चा वार्ड के तीन मरीज इलाज छोड़ने को मजबूर हुए और कहा डाक्टर की हड़ताल खत्म होने के बाद फिर दिखाने आ जाएंगे। तीन दिन तक जब डाक्टर ने नहीं आना तो वे भी क्या करेंगे। नहीं हुई आंखों की जांच

गांव बलूर से आंखें की जांच करवाने आई सबीर कौर ने कहा सोमवार को आंखों के डाक्टर का दिन था, लेकिन यहां आकर पता चला कि डाक्टरहड़ताल पर है। प्राइवेट अस्पताल आंखों को दिखाती है तो कम से कम एक हजार रुपए खर्च होगा। टेस्ट हुए पर नहीं मिली दवा

गांव अलीके से सरकारी अस्पताल में आई रेश्मा ने कहा कि शनिवार को टेस्ट के लिए बुलाया था। पर्ची होने कारण टेस्ट तो हुए लेकिन दवा देने वाला डाक्टर नहीं है। तीन दिन का इंतजार करना बड़ा मुश्किल है। हड़ताल की जानकारी मरीजों को भी मिलनी चाहिए। प्राइवेट अस्पताल से करवाना पड़ेगा अल्ट्रासाउंड

गांव उगोके की मनजीत कौर ने कहा अस्ट्रासाउंड कराने आई थी लेकिन डाक्टर हड़ताल पर है। पता चला है हड़ताल तीन दिन चलेगी। अब मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल जाना होगा। एक महीने से हड़तालें चल रही हैष मरीजों का इसमें क्या दोष है।

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