जतिन्द्र पिकल, फिरोजपुर

निर्जला एकादशी व्रत को पारिवारिक रिश्तों के लिए खास माना जाता है। वहीं इस व्रत में भगवान विष्णु (लक्ष्मी नारायण) जी की पूजा का खास महत्व है। देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाने वाला यह व्रत अपने आप में बहुत कुछ संजोए है।

धन,यश व मुक्ति के लिए खास है यह व्रत: पंडित टिक्का राम

निर्धन निकेतन मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित टिक्का राम का कहना है कि निर्जला व्रत का आना ग्रीष्म ऋतु आने को दर्शाता है। इस व्रत में 24 घंटे निराहार व्रत रखकर जाने-अनजाने में किये पाप मिटते हैं। इस व्रत में दान का अपना एक खास महत्व है। जैसे शरद ऋतु में लकडि़यां दान करना अच्छा माना जाता है वैसे ही निर्जला एकादशी व्रत में घड़ा, जल, सुराही, फल आदि दान करना शुभ माना जाता है।

पापों से मुक्ति के लिए है यह व्रत : पंडित अंशु

पंडित अंशु शर्मा के मुताबिक इस बार कोरोना के कारण चाहे ठंडे पानी की छबीलें न लगे लेकिन इस के बावजूद इस व्रत का महत्व कम नही होता। इस व्रत के जरिये अगर भगवान विष्णु की पूजा सच्चे दिल से की जाए तो निसंदेह हमारे बुरे क्रमों को भी मिटा दिया जाता है।

परिवार की सुख समृद्धि के लिए व्रत रखना जरूरी मानती हूं : वीना मोंगा

अपने परिवार की सुख शांति के लिए कोई भी इंसान कभी पीछे नहीं हटता। व्रत रखना तो वैसे भी शुभ माना जाता है। इसी लिए मुझे यह व्रत रखना अधिक अच्छा लगता है। वह पिछले कई वर्षों से यह व्रत रख रही हैं।

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व्रत रखना घर की मान-मर्यादा के लिए भी शुभ : सीमा शर्मा

निर्जला एकादशी का व्रत रखने से जहां धर्म की तरफ ध्यान जाता है वहीं परिवार के मेंबरों को अपने ईष्ट देवता की पूजा करने का बल मिलता है। इस व्रत के जरिये घर परिवार में सुख शांति के लिए पूजा करना अच्छा लगता है।

Posted By: Jagran

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