अमृत सचदेवा, फाजिल्का

चुनाव प्रचार पर चुनाव आयोग के डंडे के डर से इस बार बैनर, झंडों, पोस्टर व अन्य प्रकार की सामग्री तो उम्मीदवार प्रयोग नहीं कर पा रहे, लेकिन हाईटेक युग में एक-दूसरे के साथ कनेक्ट रहने का माध्यम बनी सोशल नेटवर्किंग साइट्स को उम्मीदवारों ने हाईटेक प्रचार का अंग बना लिया है। इन दिनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की ओर से अपने सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए दोस्तों से अपने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान की अपील की जा रही है।

हाईटेक युग में भारी संख्या में लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। फाजिल्का की बात करें तो बीएसएनएल, कनेक्ट सहित विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के करीब तीन हजार कनेक्शन हैं। एक कनेक्शन को एवरेज 5-7 लोग इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकार इंटरनेट प्रयोग करने वाले करीब 20 हजार लोगों में से 10 हजार से अधिक लोग फेसबुक, ट्वीटर, आरकुट सरीखी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इतने बड़े समूह में अपना संदेश पहुंचाने के लिए जहां उम्मीदवार अपनी साइट से अपने फ्रेंडशिप सर्किल में अपना प्रचार कर रहे हैं वहीं उनके समर्थक भी अपने सर्किल में अपने उम्मीदवार को जिताने की अपील कर रहे हैं। इसका सीधा फायदा ये है कि फ्री में प्रचार हो रहा है वहीं इन साइट्स पर चुनाव आयोग की टेढ़ी नजर न होने का फायदा भी उम्मीदवारों को मिल रहा है।

इस बारे में एडीसी कम सहायक चुनाव अधिकारी चरणदेव सिंह मान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इंटरनेट के जरिये चुनावी विज्ञापनों पर रोक तो है लेकिन अभी तक उन्हें इस बारे में कोई हिदायत नहीं मिली है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हो रहा प्रचार विज्ञापन की श्रेणी में आता है या नहीं।

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