दीपक पोहिया, अबोहर : आसमानी आतंकी कहे जा रहे खतरनाक टिड्डी दल के राजस्थान सीमा के रास्ते पंजाब में प्रवेश से किसानों की नींद उड़ गई है। हालांकि पंजाब का कृषि विभाग अलर्ट पर है और अभी खेतों में किसी तरह के नुकसान की बात को सिरे से खारिज कर रहा है। बावजूद इसके अगर टिड्डी दल ने राज्य में पूर्णरूप से प्रवेश किया तो फसलों को यह बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। कृषि विभाग ने वीरवार को राजस्थान सीमा से सटे गुमजाल और कल्लरखेड़ा गांव के खेतों में जाकर स्थिति का जायजा लिया । विभाग ने माना कि टिड्डी दल ने पंजाब में प्रवेश तो कर लिया है, लेकिन अभी इनकी कुछ ही संख्या है। विभाग ने किसानों को सतर्कता बरतने की बात कही है। इसके लिए टिड्डी को उड़ाने की बजाय उसे पेस्टीसाइड से खत्म करने की बात कही। पंजाब से सटे राजस्थान के कई गांवों में खतरनाक टिड्डी दल ने किसानों की नींद उड़ा रखी है और वे खेतों ने थालियां बजाकर अपनी फसल की रक्षा कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक टिड्डी दल ने पाकिस्तान में किसानों का खासा नुकसान किया है। वहां की सरकार इससे निपटने में विफल रही अब यही राजस्थान सीमा में होते हुए पंजाब में प्रवेश करने को आतुर है। पंजाब से सटे राजस्थान के खेतों में इन कीटों को रोकने के लिए राजस्थान सरकार कीटनाशक का छिड़काव कर दिया है और पशुपालकों को छिड़काव क्षेत्र में पशु नहीं चराने की हिदायत भी जारी कर दी है। हालांकि फसलें नहीं होने के कारण नुकसान होने की आशंका नहीं है, लेकिन अमरूद, आंवला, बेर आदि के बाग मालिकों को चिता सता रही है। अब पंजाब में प्रवेश के मद्देनजर यहां के किन्नू बाग मालिकों, कपास, कनक और झोना उगाने वाले किसानों के लिए चिता की बात हो सकती है क्योंकि फसल के हरे भरे पत्ते इनका प्रमुख भोजन होते हैं।

पूरे खेत को मिनटों चट कर सकता है टिड्डी दल

टिड्डी दल किसानों के लिए आतंक का दूसरा नाम है। एक बार यह पूर्णरूप से किसी खेत में प्रवेश कर जाए तो फसल को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसका एक दल एक दिन में 10 हाथी या 20 ऊंट के भोजन जितना खाद्यान्न खा सकता है। टिड्डियां पौधे के फल, फूल, पत्ती, बीज, वृद्धिकारक हिस्से सहित अधिकांश भागों को खा जाती है और अंत में टिड्डियों के भार से पौधे झुककर गिर जाते हैं।

27 साल पहले चर्चा में आया टिड्डी दल

टिड्डी दल जब आया है, तब तब देश के किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। कई बार सरकारों ने मुआवजे का भी मरहम लगाया। वर्ष 1993 में टिड्डी हमले के दौरान चार महीनों तक टिड्डियों ने उत्पात मचाया था। उस समय सरकार ने वायुसेना की मदद लेकर हवाई जहाजों से स्प्रे करवाया था। इस बार कम से कम पंजाब में इतना बड़ा आउटब्रेक न हो इसके लिए कृषि विभाग अभी से चौकस है। टिड्डियां काफी समय से पड़ोसी राज्य में आतंक मचा रही है। दल एल दिन में 150 किलोमीटर दूरी भी तय कर सकता है ऐसे में पंजाब को सतर्क रहने की जरूरत तो है। जानकारों के मुताबिक टिड्डी के अंडे कुछ ही घण्टों में टिड्डी का रूप ले लेते हैं।

पंजाब में फिलहाल यहां यहां ज्यादा खतरा

यह टिड्डी दल राजस्थान की सीमा से पंजाब में आ रहा है ऐसे में ज्यादा चिता अबोहर, फाजिल्का, जलालाबाद, फिरोजपुर, मलोट, बठिडा फरीदकोट आदि के अंतर्गत पड़ते खेतों में खड़ी फसलों और बागों को लेकर है। अबोहर में तो इस समय किन्नू फ्रूट अपने पूरे यौवन पर है। किन्नू उत्पादक किसान काफी चौकस हैं और वे अभी से उपायों में लग गए हैं।

Posted By: Jagran

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