संवाद सहयोगी, फाजिल्का : डीसी अरविंद पाल सिंह संधू ने डेंगू और मलेरिया की रोकथाम संबंधी लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।

डीसी ने बताया कि साल 2018 में डेंगू के 120 और मलेरिया के नौ और साल 2019 में डेंगू के 661 और मलेरिया के 28 केस आए थे। उन्होंने बताया कि इस साल कोरोना महामारी फैली हुई है, इसलिए लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए पहले से ही जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को इसके लक्षणों और बचाव के बारे में जानकारी दी जाए।

इस मौके पर डॉ. सुनीता ने बताया कि डेंगू का मच्छर साफ खड़े पानी में पैदा होता है। उन्होंने बताया कि बुखार के साथ तेज सिर दर्द, माथा दर्द, पसीना आना, आंखों के पिछली तरफ दर्द, जी कच्चा होना, मांसपेशियों में दर्द, छाती और शरीर पर लाल धब्बे होने और नाक और मुंह में से खून आना डेंगू के लक्षण है। इसी तरह मलेरिया पैदा करने वाला मच्छर छप्पड़ों और गंदे पानी में पैदा होता है। उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए गड्ढों को बंद किया जाए और छप्पड़ों के किनारों पर हर हफ्ते काला तेल डाला जाए, जिससे मच्छर पैदा न हो सके।

उन्होंने कहा कि घरों में पड़े कबाड़, टायर, टूटे घड़े, गमले, पशु और मछलियों के बर्तन और अन्य पानी स्टोर करने वाले बर्तन को हर सप्ताह साफ किया जाए। उन्होंने कहा कि पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े डालने चाहिएं और रात व दिन के समय भी मच्छरदानियां और मच्छर भगाने वाली क्रिम का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ संपर्क करना चाहिए। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. चंद्र मोहन कटारिया, राजेश कुमार, नरेश खेड़ा के अलावा अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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