मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, अबोहर : सिख विरोधी दंगों में दिल्ली पुलिस ने सबूतों के अभाव की बात कह कर 1994 में जो केस बंद कर दिए थे। भाजपा सरकार के शासनकाल में 2015 में केंद्रीय ग्रह मंत्रालय द्वारा गठित एसआईटी ने मामले को फिर से जांच शुरू करवाई और दोबारा आरोप पत्र दाखिल किए। उसी का नतीजा है कि सिख विरोधी हुए दंगों में पहली बार एक दोषी को फांसी व दूसरे को उम्रकैद की सजा मिली है। अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए अबोहर के भाजपा विधायक अरुण नारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर व सज्जन कुमार भी इस कत्लेआम के दोषी हैं और इन दोनों को कांग्रेस ने अहम पद देकर रखे हैं, जिससे लगता है पीड़ित परिवारों के साथ कांग्रेस की कोई सहानुभूति नहीं है।

विधायक नारंग ने कहा कि इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों में यह आस जगी है कि अन्य मामलों में भी पीड़ितों को न्याय मिलेगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। नारंग ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की कोशिशों की वजह से 1984 के सिख दंगों के दो दोषियों को सजा मिली है। उन्होंने कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश ¨सह बादल व शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की अपील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में एसआईटी गठित की, जिसने 1994 में दिल्ली पुलिस द्वारा बंद कर दिए गए केसों को फिर से खोला और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना शुरू हुआ। कांग्रेस के शासन में पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद ही खत्म हो गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दंगा पीड़ितों को इंसाफ मिलना शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा ही पंजाबियों की सच्ची हिमायती है जबकि कांग्रेस शासन काल में तो यह केस ही बंद कर दिया गया था।

Posted By: Jagran

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