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मंडी गोबिंदगढ़ में बिजली संकट गहराया, स्टील उत्पादन 30% घटा, करोड़ों का राजस्व नुकसान

Published: Mon, 07 Sep 2026 05:53 PM (IST)

'एशिया की स्टील सिटी' मंडी गोबिंदगढ़ का लोहा उद्योग बिजली संकट से जूझ रहा है, जिससे उत्पादन में 30% की ...और पढ़ें

बिजली कट से करोड़ों का नुकसान।

 बिजली कट से करोड़ों का नुकसान।

HighLights

  1. मंडी गोबिंदगढ़ में 5 घंटे के बिजली कट से उत्पादन 30% गिरा

  2. पंजाब सरकार को प्रति माह 60-80 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा

  3. निर्माण सामग्री व कृषि मशीनरी के दाम बढ़े, निर्यात प्रभावित

नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। 'एशिया की स्टील सिटी' के नाम से मशहूर मंडी गोबिंदगढ़ का लोहा उद्योग इस समय राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बढ़ते अंतर के कारण गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है।

रोजाना लग रहे 4 से 5 घंटे के पावर कट के कारण उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। जिसका सीधा असर पंजाब सरकार के राजस्व, राष्ट्रीय बाजार और विदेशी निर्यात पर भी पड़ रहा है।

मंडी गोबिंदगढ़ औद्योगिक बैल्ट में 150 से अधिक इंडक्शन फर्नेस और 250 से अधिक रोलिंग मिल्स संचालित होती हैं, जो देश के निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र की रीढ़ हैं। लेकिन मौजूदा बिजली संकट के कारण इन इकाइयों के लिए रात 7:00 बजे से 12:00 बजे तक बिजली कटौती की जा रही है।

5 घंटे के बिजली कट से उत्पादन गिरा

पीक ऑवर्स में लगातार 5 घंटे का कट लगने से औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन 25 से 30 प्रतिशत तक घट गया है। उत्पादन ठप होने और सप्लाई चेन बाधित होने से इंगट (एक तरह का कच्चा माल) के रेट 42,200 रुपये से बढ़कर 46,400 रुपये प्रति टन तक पहुंच गए हैं, जिससे प्रति टन लगभग 4,200 रुपये का भारी उछाल आया है।

उत्पादन में आई इस गिरावट का सीधा और बड़ा झटका पंजाब सरकार के खजाने को भी लग रहा है। स्टील उद्योग पंजाब के कुल राज्य माल और सेवा कर तथा वैट राजस्व का एक प्रमुख जरिया है।

राज्य सरकार के वार्षिक कर राजस्व संग्रह में मंडी गोबिंदगढ़ के स्टील क्लस्टर का महत्वपूर्ण योगदान रहता है, लेकिन उत्पादन और बिक्री ठप पड़ने से पंजाब के स्टील क्षेत्र से मिलने वाले कर राजस्व में 20 से 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

पंजाब सरकार के खजाने को भारी चपत

यदि स्टील उद्योग से राज्य को सालाना औसतन 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त होता है, तो मौजूदा स्थिति के हिसाब से पंजाब सरकार को प्रति माह लगभग 60 से 80 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली कटौती से उत्पादन लागत बढ़ने और आपूर्ति घटने के कारण कृषि मशीनरी, इंजीनियरिंग गुड्स और कंस्ट्रक्शन मटीरियल (सरिया, गाटर, एंगल इत्यादि) के दामों में 2,000 से 3,000 रुपये प्रति टन का इजाफा हो गया है।

इससे देशभर में चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे नेशनल हाइवे, रियल एस्टेट और रेलवे निर्माण की लागत बढ़ेगी। मंडी गोबिंदगढ़ का बिजली संकट केवल एक शहर की समस्या न रहकर पंजाब की अर्थव्यवस्था और देश के स्टील सप्लाई चेन तंत्र के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।

यदि पावरकाम और पंजाब सरकार ने मांग-आपूर्ति के अंतर को जल्द नहीं पाटा, तो राज्य को और बड़ा आर्थिक झटका झेलना पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर मार और उद्योगपतियों की चिंता

पंजाब से खाड़ी देशों, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर कृषि उपकरण और इंजीनियरिंग सामान का निर्यात किया जाता है। उत्पादन चक्र टूटने से सप्लाई टाइमलाइन मिस हो रही है और लागत बढ़ने के कारण भारतीय निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन व वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले पिछड़ रहे हैं, जिससे निर्यात ऑर्डर्स में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आई है।

लोकल मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि अगर बिजली सप्लाई की स्थिति जल्द सामान्य नहीं की गई, तो उत्पादन लागत इतनी बढ़ जाएगी कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खरीदारों को पुराने रेट पर माल की डिलीवरी देना असंभव हो जाएगा।

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