पवित्र हंसला नदी में बह रहा जहरीला पानी, लैब रिपोर्ट में खुली पोल; मानक से 10 गुना ज्यादा अधिक मिला खतरनाक बैक्टीरिया
फतेहगढ़ साहिब की ऐतिहासिक हंसला नदी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के अनुपचारित पानी से प्रदूषित हो रही है, जिससे प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है।

दावों और हकीकत के बीच घुटती हंसला नदी बनी गंदा नाला।
HighLights
एसटीपी के अनुपचारित पानी से हंसला नदी प्रदूषित।
पीपीसीबी लैब रिपोर्ट ने उच्च प्रदूषण स्तर उजागर किया।
प्रदूषित पानी से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा।
नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। पंथक महत्व वाली ऐतिहासिक हंसला नदी (सरहिंद चो) प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच दम तोड़ रही है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पानी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा पंजाब मानवाधिकार आयोग को भेजी गई रिपोर्ट और पीपीसीबी की लैब रिपोर्ट ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।
ट्रीटमेंट के नाम पर नदी में छोड़ा जा रहा अमिश्रित व विषैला पानी इंसानी जीवन और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है, प्रशासन की लापरवाही ने प्राकृतिक जल स्त्रोत को गंदा नाला बना दिया है, जबकि जिम्मेदार महकमे कागजी लीपापोती में व्यस्त हैं।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एक जागरूक नागरिक ने दैनिक जागरण की खबर को आधार बनाकर हंसला नदी के बढ़ते प्रदूषण को मानव जीवन के लिए घातक बताते हुए मानवाधिकार आयोग को व्हाट्सएप पर शिकायत भेजी। आयोग ने इसका संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से जवाब तलब किया।
जिला प्रशासन ने 16 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट भेजी। इसमें तर्क दिया गया कि 5 एमएलडी क्षमता का यह एसटीपी अभी 'अंडर टेस्टिंग/स्टेबलाइजेशन मोड' में है और सीवरेज पानी ट्रीट कर सरहिंद ड्रेन में छोड़ा जा रहा है। प्रशासन का दावा था कि आगे चलकर यह पानी मृदा संरक्षण विभाग द्वारा सिंचाई के काम लाया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।
इस रिपोर्ट के एक महीने बाद 10 जुलाई को पंजाब प्रदूषण बोर्ड पीपीसीबी द्वारा इसी प्लांट के आउटलेट से लिए गए पानी के नमूनों की 23 जुलाई को जारी हुई लैब रिपोर्ट ने प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी। हंसला नदी में प्रदूषण को लेकर एनजीटी में भी याचिका विचाराधीन है, जहां पंजाब सरकार, जिला प्रशासन, ड्रेनेज विभाग और नगर कौंसिल से जवाब मांगा गया था, जो अब तक दाखिल नहीं हुआ है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या 'टेस्टिंग मोड' की आड़ में मानकों से समझौता कर एक पवित्र नदी को जहरीले गंदे नाले में तब्दील करना जायज है? इस फेल रिपोर्ट के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
पर्यावरण और जीवन पर मंडराता भयावह खतरा
जल स्रोत में बीओडी का यह ऊंचा स्तर पानी में घुलनशील आक्सीजन को खत्म कर देता है, जिससे जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट हो जाता है। वहीं, फीकल कोलीफार्म का तय सीमा से लगभग 10 गुना अधिक होना पानी में मानव मल की भारी मौजूदगी दर्शाती है।
यही प्रदूषित पानी भूजल में रिसकर हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और त्वचा रोगों का खतरा पैदा करता है। जब इस दूषित पानी से फसलों की सिंचाई होगी, तो ये जहरीले रसायन और बैक्टीरिया खाद्य चक्र का हिस्सा बनकर कैंसर और लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों को जन्म देंगे।
आरटीआई से सामने आई लैब रिपोर्ट
बीओडी (बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड): 15 एमजी/लीटर मिली, एनजीटी का मानक 10 एमजी/लीटर से कम का है।
टीएसएस (टोटल सस्पेंडेड सालिड्स): 24 एमजी/लीटर पाया गया, मानक 20 एमजी/लीटर से कम है।
फीकल कोलीफार्म: 2100 एमपीएन निकला, तय मानक 230 एमपीएन है।
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