लखवीर ¨सह, दीपक सूद, फतेहगढ़ साहिब :

केंद्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों को आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाने के लिए भले ही प्रति लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले के हर गांव में 20 से 25 ऐसे घर हैं जहां लोगों को इस योजना का नहीं मिल सका है। केंद्र सरकार के पांच साल भी पूरे होने पर चुनाव भी होने वाले हैं, लेकिन आवास योजना के हकदार लोग इस योजना के लाभ से वंचित ही रह जाएंगे। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से कई घरों की छतें गिरने से मौतें भी हुई और कई लोग जख्मी भी हो चुके हैं। बीते दिनों अमलोह भद्दलथूहा में छत गिरने से एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी और उसका पोता गंभीर जख्मी हो गया था। दैनिक जागरण टीम ने फतेहगढ़ साहिब के विभिन्न गांवों का दौरा किया तो कई लोग खुद के हालात पर आंसू नहीं रोक पाए। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग महिलाएं थीं। टीम ने जिले के तीन हलकों के गांव सानीपुर, खालसपुर, दुफेड़ा आदि का दौरा किया तो वहां 20-25 के करीब कच्चे मकान देखे गए। ये सभी मकान गरीबी रेखा के नीचे वालों के हैं जो आज भी आवास योजना का लाभ लेने का इंतजार कर रहे हैं। खालसपुर की कर्मजीत कौर, सानीपुर गांव के हरमेल ¨सह, गुरचरन ¨सह, गुरमीत ¨सह, चरनजीत कौर, ज¨तदर कौर ने बताया कि वे पिछले करीब 34 सालों से अपने कच्चे मकान में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतने साल बीत जाने के बावजूद उन्हें सरकारी सहूलियत नहीं मिली और न ही कोई अधिकारी सर्वे करने आया।

जर्जर हो चुके हैं मकान

अगर जिले भर के 400 से अधिक गांवों में जाकर देखा जाए तो हर गांव में 20-25 ऐसे घर मिल जाएंगे जिनमें रहने वाले लोग अपनी जान हथेली पर लेकर सोते हैं। घर की कच्ची छत उन पर कब गिर जाए इसका किसी को कुछ नहीं पता।

263 का था लक्ष्य, अब तक बने 165 मकान : एडीसी

एडीसी जग¨वजदरजीत ¨सह ने बताया कि जिले में अब तक अवास योजना के तहत रखे लक्ष्य के मुताबिक 263 कच्चे मकानों को पक्का बनाने के लिए 165 लोगों को ही इसका लाभ मिला है जिनमें 98 लोगों के मकान बनने बाकी हैं।

Posted By: Jagran