जागरण संवाददाता, पटियाला : जिला फतेहगढ़ साहिब में मौजूदा समय में लंपी स्किन की बीमारी से 667 पशु ग्रस्त हैं, जबकि पांच पशुओं की मौत हो चुकी है। हालांकि विभाग अधिकारियों का कहना है कि उक्त 667 बीमार पशुओं में से 50 से अधिक पशुओं की रिकवरी हो गई है। उधर, पशु पालन विभाग को सरकार ने स्किन की बीमारी से बचाव करने के लिए दवा खरीद को तीन लाख रुपये का बजट दिया है।

पशुपालन विभाग के जिला अधिकारी डा. जमील खान ने बताया कि यह बीमारी दक्षिण राज्यों के क्षेत्रों में आम तौर पर फैलती रहती है। पंजाब में यह बीमारी देखने को बहुत कम आई है। इसके लक्षणों में पशु को बुखार, भूख में कमी और शरीर पर मोटे मोटे दाग (फोड़े) हो जाते हैं। बुखार तो पांच दिन में चला जाता है, लेकिन फोड़े ठीक होने में दो से तीन सप्ताह का समय लगता है। इसलिए मौजूदा समय में इसके बचाव के लिए गोशाला के संचालक अथवा जिनके पास अधिक पशु हैं वे लोग फागिग करवाएं, क्योंकि इसका मुख्य स्त्रोत गंदा मौसम और इसमें उपजे कीट पतंगे हैं। बरसती मौसम के बाद यह बीमारी खुद ब खुद चली जाएगी।

डा. जमील खान बताते है कि जिन पांच पशुओं की मौत हुई है उनका कारण भी लंपी स्किन की बीमारी नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि उक्त पशुओं का पोस्टमार्टम नहीं किया जाता है। उन्होंने बीमारी पशुओं की संख्या के बारे में साफ किया है कि यह वो पशु हैं जो उनके पास रजिस्टर हैं। कुछ किसान पशुओं का खुद भी इलाज करवा रहे हैं और काफी लोग पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं इस लिए यह संख्या में बढ़ोतरी भी हो सकती है। दवा खरीद के लिए बनाई कमेटी

डा. जमील खान बताते है कि पंजाब सरकार ने लंपी स्किन की बीमारी से बचाव के लिए हर जिले को दवा खरीद को बजट दिया है। इसी दौरान उनको भी तीन लाख का बजट मिला है और मंजूरी मिल गई है। जल्द ही दवा खरीदकर बीमार पशुओं के मालिकों को मुफ्त में दवा दी जाएगी।

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