जागरण संवाददाता, फरीदकोट

पंजाब के 109 नर्सिंग कालेजों की रिक्त पड़ी सीटों को भरने का दबाव बाबा फरीद यूनिवर्सिटी पर देखा जा रहा है। दबाव और नर्सिंग कालेजों की परेशानी को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने सीटों को भरने के लिए दोबारा प्रवेश परीक्षा तो ली, परंतु इस बार भी 50 फीसद पासिग अंक हासिल करने में परीक्षार्थी सफल नहीं हो पाए।

परीक्षार्थी आसानी से पचास फीसदी प्रवेश परीक्षा में अंक हासिल कर सके, इसके लिए अपेक्षाकृत प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र भी सरल बनाया गया था, फिर भी 220 परीक्षार्थी ही पचास फीसद अंक हासिल करने में सफल रहे। वह अभिभावक भी हैरान हैं कि दो बार प्रवेश परीक्षा देने के बावजूद उनके बच्चे परीक्षा में इतना भी अंक हासिल नहीं कर पाए, जिससे कि उन्हें प्रवेश मिल सके। यूनिवर्सिटी द्वारा ली गई दो बार प्रवेश परीक्षा में कुल सात हजार परीक्षार्थी शामिल हुए और इसमें से मात्र सवा पांच सौ ही 50 फीसद की पासिग लाइन क्रास करने में सफल रहे।

रविवार को न्यू माडल स्कूल में बने परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने के लिए होशियारपुर से आए जसबीर सिंह व बटाला से आए जसकरन ने बताया कि उन दोनों की बेटियों ने 28 अगस्त को हुई पहली प्रवेश परीक्षा में भी भाग लिया था, परंतु वह असफल रही है। उक्त लोगों ने कहा कि अभिभावक के नाते वह लोग चाहे जो सुविधा अपने बच्चों को मुहैया करवा दे, परंतु यदि बच्चा पढ़ेगा ही नहीं तो वह क्या करे, बच्चे किताब व कोर्स से ज्यादा समय मोबाइल में बिता रहे है, जिससे वह प्रतियोगी परीक्षाओं से पिछड़ते जा रहे हैं।

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डाक्टर राज बहादुर ने कहा कि जीवन में सफल बनने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत है। कुछ युवा बिना मेहनत के सबकुछ हासिल कर लेना चाहते है। युवा मेहनत से जितना दूर भागेंगे उतना ही वह प्रतियोगिता में पिछड़ते जाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि मेडिकल लाईन से संबंधित सभी युवा कठिन मेहनत करे और अपने विषय के माहिर बने तभी वह अपनी मंजिल व सपनों को हासिल कर सकते हैं।

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