जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : चंडीगढ़ के गांव और पेरीफेरी एरिया का विकास और लाल डोरा की समस्या को खत्म करने के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार हो गई है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट बेंगलुरू (आइआइएचएस) ने यह पॉलिसी ड्राफ्ट तैयार किया है। पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के एरिया की बेस्ट प्रेक्टिस पर स्टडी करने के बाद यह पॉलिसी ड्राफ्ट तैयार हुआ है। जब यह पॉलिसी नोटिफाई हो जाएगी तो इस पर काम शुरू होगा। यह प्लान इंप्लीमेंट कराने के लिए स्पेशल विलेज प्लानिग सेल बनाए जाएंगे। यह सेल नगर निगम, सीएचबी और अर्बन प्लानिग डिपार्टमेंट के साथ बेहतर तालमेल रखते हुए निर्धारित समय सीमा में इसे पूरा करेंगे।

बुधवार को आइआइएचएस के कंसल्टेंट ने ऑनलाइन मीटिग के दौरान प्रशासन के अधिकारियों को इस ड्राफ्ट पॉलिसी प्रेजेंटेशन दी। एडवाइजर धर्म पाल की अध्यक्षता में आयोजित इस मीटिग में प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के तहत लैंड एग्रीगेशन पॉलिसी और गांव पेरीफेरी एरिया की प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान पर यह मीटिग रखी गई थी। एडवाइजर ने आइआइएचएस कंसल्टेंट की प्रेजेंटेशन के बाद इस डेवलपमेंट के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी और दूसरे एक्ट गाइडलाइंस को शामिल करने के लिए कहा। डेवलपमेंट प्लान पर चीफ आर्किटेक्ट की प्रेजेंटेशन

चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया ने गांवों की मौजूदा हालत और डेवलपमेंट प्लान पर स्टडी की प्रेजेंटेशन अधिकारियों के सामने दी। चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के तहत संभावित विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लाल डोरा से बाहर किस तरह से निर्माण हो चुका है। साथ ही गांवों की मौजूदा हालत कैसी है। गांवों के मौजूदा स्वरूप को कैसे संवारा जा सकता है। मास्टर प्लान की सिफारिश अनुसार जो डेवलपमेंट प्लान गांवों के लिए तैयार किए गए हैं उनको नगर निगम सीएचबी इस पॉलिसी के तहत लागू करेंगे।

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