जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। यदि आप किसी कार्यालय चाहे वह सरकारी हो या निजी, में कार्यरत हैं और बिता मंजूरी के छुट्टी करते हैं तो स्वाभाविक है कि आप पर कार्रवाई होगी। ऐसा ही मामला चंडीगढ़ नगर निगम में सामने आया है। जहां निगम के तीन कर्मचारियों ने बिना मंजूरी के कई दिन से छुट्टियों पर चल रहे थे। इसके बाद उन तीनों कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए कमीश्नर ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से दो कर्मचारी तो बीते डेढ़ साल यानि 500 दिन से छुट्टियों पर चल रहे थे।

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में दो एमओएच विभाग और एक कमिश्नर ऑफिस का कर्मचारी है। तीनों को नोटिस जारी कर सुनवाई की तारीख दी गई है। जिसमें यह कर्मचारी अपना पक्ष रखेंगे। कारण न बता पाने के बाद तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। नगर निगम के अनुसार एमओएच विभाग में कार्यरत दो कर्मचारी डेढ़ साल से कार्यालय ही नहीं आ रहे थे। आयुक्त ने तीनों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया। जहां तीनों ने एक प्रार्थनापत्र देकर बहाली की मांग की है। सही कारण न बताने पर तीनों को बर्खास्त कर दिया गया है।

कमिश्नर केके यादव ने बताया कि सबसे ज्यादा शिकायत फील्ड वाले कर्मचारियों की रहती है। सख्ती दिखाते हुए महीनों से गायब कर्मचारियों को अब तलब करना शुरू कर दिया है। अनुबंधित, दैनिक वेतनभोगी सभी कर्मचारियों की उपस्थिति के बारे में आयुक्त ने जानकारी मांगी है। इस संबंध में निगम के टैक्स विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी बीमार होने के कारण बिना बताए छुट्टी पर चला गया था। उसके बाद लगातार कोई जानकारी न मिलने पर विभाग ने सूचना आयुक्त को दी। इसी तरह एमओएच विभाग में कार्यरत दो कर्मचारी डेढ़ साल से नहीं आ रहे थे।मालूम हो कि नगर निगम में इस समय दस हजार कर्मचारी है। जिनमें से चार हजार कर्मचारियों की कारगुजारी पर नजर रखने के लिए स्मार्ट वॉच भी दी गई है।

कमिश्नर केके यादव का कहना है कि सबसे ज्यादा शिकायत फील्ड वाले कर्मचारियों की रहती है। एमओएच को सफाई निरीक्षक और मुख्य सफाई निरीक्षक के साथ सुबह के समय फील्ड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। तीन से ज्यादा कोई अवकाश पर है तो उसकी भी जानकारी प्रतिदिन देनी है। कर्मचारी की छुट्टी लेने का कारण भी प्रतिदिन की रिपोर्ट में देना होता है। बिना बताए गायब लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।

Edited By: Ankesh Thakur