जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : 2010 में चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिग (सीटीयू) में कंडक्टर भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। इस दौरान अपनी जगह किसी और से पेपर कराने और उनकी सहायता करने वाले तीन लोगों को जिला अदालत ने दोषी करार देते हुए दस साल बाद पिछले महीने ही 18 महीने की कैद की सजा सुनाई थी। अब निचली अदालत से सजा पा चुके तीनों दोषियों ने सीबीआइ की स्पेशल अदालत में सजा के आदेश को चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। चुनौती देने वाले तीनों युवकों की पहचान हरियाणा के जिला सोनीपत के गांव तिहाड़ मलिक निवासी राजिद्र, भट्टगांव निवासी संजय भारद्वाज और विकास नगर निवासी संदीप कुमार के रूप में हुई। वहीं, अदालत ने सुबूतों के अभाव में तिहाड़ मलिक निवासी नवीन कुमार को बरी कर दिया था। 10 साल पहले का है मामला

2010 में सीटीयू ने कंडक्टर के पदों पर भर्ती करने के लिए विज्ञापन जारी किया था। जिसके बाद इसके आवेदकों की तीन अक्टूबर, 2010 को चंडीगढ़ के विभिन्न स्कूलों में परीक्षा होनी थी। इस दौरान सीबीआइ को सूचना मिली थी कि इन परीक्षाओं में नकल हो रही है। कई जगहों पर कई छात्रों की जगह दूसरे परीक्षा दे रहे है। जिसके तहत सीबीआइ की टीम ने सेक्टर-23 स्थित सरकारी मॉडल स्कूल में पहुंची थी। इस दौरान सीबीआइ ने संजय को गिरफ्तार किया था। वह राजिन्द्र की जगह पर पेपर दे रहा था। सीबीआइ ने जब संजय से उसी समय पूछताछ की तो उसने बताया कि संदीप कुमार नाम का युवक सेंटर के बाहर एक कार में बैठ कर नकल करने में उसकी सहायता कर रहा था। जिसके बाद सीबीआइ ने संजय, राजिन्द्र और संदीप को गिरफ्तार किया था। साढे़ चार लाख रुपये में हुआ था सौदा

जांच में सामने आया था कि संदीप कुमार ने नवीन कुमार के साथ मिलकर यह सारी साजिश रची थी। नवीन ने ही असली आवेदक रजिन्द्र कुमार की जगह पर संजय को पेपर देने के लिए तैयार किया था। इसके लिए साढ़े चार लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। नवीन ने एडवांस के एक लाख रुपये राजिन्द्र से लेकर संदीप तक पहुंचा भी दिए थे। जिसके बाद यह राशि सभी में बांटी भी गई थी। लेकिन जैसे ही पता चला तो सीबीआइ ने चारों को गिरफ्तार कर लिया था।

Posted By: Jagran

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