चंडीगढ़ , जेएनएन। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (अारएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने सीएए के साथ खालिस्तानी समर्थकों को भी नसीहत दी है। इंद्रेश का कहना है कि खालसा पंथ की स्थापना धर्म की रक्षा के लिए की थी, उस समय कौन धर्म था यह सबको पता है। अभी हमें जो कमी खलती है, वह ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब की है, ऐसे में इन्हें भी देश में जोड़ने के लिए प्रयास करना चाहिए।

लााहाैर में हुई थी पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना

सेक्टर-37 के लॉ भवन में जोशी फाउंडेशन की तरफ से आयोजित इंपेक्ट ऑफ सीएए विषय पर बात करने पहुंचे इंद्रेश कुमार ने बताया कि इस साल उनके बैच को पासआउट हुए 50 साल हो गए हैं, ऐसे में उन्होंने अपने दोस्तों की जिद्द के चलते उन्हें बिजी शेड्यूल में चंडीगढ़ आना पड़ा।

ऐसे में वह दोस्तों को बता कर आए हैं कि अपने बैच की 60वीं वर्षगांठ का जश्न वह लाहौर में ही मनाएंगे। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज पहले लाहौर में ही था। आजादी के बाद इसे पहले रूड़की में शिफ्ट किया गया और उसके बाद साल 1953 में चंडीगढ़ स्थापित किया।

सीएए का विरोध सिर्फ सियासी पैंतरा, पंजाब सरकार को भी कोसा

इंद्रेश कुमार ने बताया नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध सिर्फ कुछ राजनीतिक पार्टियों की कुंठा है। इन विरोध प्रदर्शनों का सहारा लेकर कुछ ईसाई और मुस्लिम देश भारत को अल्पसंख्यक विरोधी बता रहे हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या हालत है यह किसी से छिपा नहीं है। सीएए में सिख समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। सिख समुदाय के लोगों को राज्य सरकार से इस पर सवाल पूछना चाहिए।

पुलवामा हमले पर कांग्रेस का बयान दुर्भाग्यपूर्ण

पुलवामा हमले पर राहुल गांधी के बयान पर इंद्रेश ने कहा कि सैनिकों की शहादत पर राजनीति करना कांग्रेस की आदत बन गई है। सियासी विरोध राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सेना से जुड़े मामले देश की प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़े होते हैं। कांग्रेस नेताओं के इन्हीं बयानों की वजह से पाकिस्तान और भारत विरोधी देशों को देश के खिलाफ जहर उगलने का मौका मिलता है।

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