डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़ : चंडीगढ़ सुखना लेक पर तीसरे मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में दूसरे दिन जान हथेली पर रख लड़ने वाले बहादुर सैनिकों की कहानी उनकी जुबानी बच्चों व लोगों ने सुनी। कार्यक्रम में शौर्य चक्र विजेता सूबेदार राजन, अनिल कुमार दहिया और दो सेना मेडल से सम्मानित राजेश कुमार, कारगिल युद्ध के हीरो महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल बलवान सिंह ने भी युवाओं को मोटिवेट किया। मौका मिला और देश जान पर खेल गए हम : कर्नल बलवान सिंह

कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेताओं कैप्टन विक्रम बत्रा और सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव के साथ टाइगर हिल को फतेह करने वाले कर्नल बलवान सिंह का देश के प्रति जज्बा बच्चों के साथ संवाद में साफ झलक रहा था। हरियाणा के झज्जर जिले के मूल निवासी बलवान को उनकी बहादुरी के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि जंग में दुश्मन के साथ हथियारों से ही नहीं हाथों से भी दो-दो हाथ करने का मौका मिला। लेकिन दुश्मन को देश की जमीन से खदेड़कर ही हमारे सैनिकों ने दम लिया। उन्हें देश की रक्षा के लिए लड़ने का मौका मिला तो उन्होंने कर सैनिक का फर्ज निभाया। जंग में बटालियन के 36 साथियों को खोने वाले बलवान सिंह ने कहा कि आर्मी में आने वाले युवाओं को बचपन से ही तराशना जरूरी है। किसी का सैल्यूट सैनिक को सबसे बड़ा सम्मान : सूबेदार राजन

एक खास ऑपरेशन में चार आतंकियों का खात्मा करने वाले सूबेदार राजन भी मिलिट्री फेस्ट में पहुंचे। बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित राजन को 24 साल के करियर में आठ बार बहादुरी के लिए मेडलों से नवाजा गया है। फेस्ट में उन्होंने कहा कि अब लड़के ही नहीं बेटियां भी देश की सरहद पर तैनात हो रही है। किसी का सैल्यूट किसी भी जवान के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। जीवन में शुरू से ही देश की फौज में जाने का मन बना लिया था। बच्चों के सवालों का बखूबी जवाब दिया। राजन हिमाचल के मूल निवासी हैं। देश के लिए शहीद होने का जज्बा जरूरी : राजेश कुमार

नायब सूबेदार राजेश कुमार राजस्थान (झूंझनू) के रहने वाले हैं जिसे शहीदों की धरती कहा जाता है। आतंकियों के खिलाफ खास ऑपरेशन में इन्होंने गजब का साहस दिखाया। इन्हें एक बार नहीं दो बार वीरता के लिए सेना मेडल से नवाजा गया है। एक सैनिक के लिए जीवन में देश की सुरक्षा के लिए लड़ना ही सबसे बड़ा सम्मान होता है। राजेश कुमार ने संवाद में कहा कि कड़े संघर्ष के लिए तैयार ही फौज में आएं।

सैनिक कभी जंग में मुड़कर नहीं देखता : अनिल दहिया

सैनिक की ट्रेनिग ऐसी होती है कि वह हर मुश्किल हालात में खुद को ढाल लेता है। उसके लिए देश की आन-बना और शान सबसे ऊपर होती है। हरियाणा के सोनीपत जिले के बहादुर नायब सूबेदार अनिल कुमार दहिया को उनकी बहादुरी के लिए 15 अगस्त 2018 को शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। दिसंबर 2017 में एक टेरिस्ट अटैक में कई आतंकियों को इन्होंने ढेर कर डाला। मिलिट्री फेस्ट को उन्होंने एक बहुत ही अच्छी शुरुआत बताया। दहिया ने कहा कि युवाओं को फौज के प्रति प्रेरित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम बहुत प्रभावी होते हैं। देश से प्रेम रखने वाला सैनिक कभी भी जंग में मुड़कर नहीं देखता। आज भी मिलिए देश के बहादुरों से

रविवार को भी सुबह 10 बजे सुखना लेक पर कार्यक्रम के अंतिम दिन के संवाद में सेना के कई बहादुर अफसर और सैनिक हिस्सा लेंगे। बच्चे उनसे सीधे रूबरू हो सकते हैं।

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