चंडीगढ़, जेएनएन। जिस कार्य में शहरवासियों को शामिल कर जनभागीदारी सुनिश्चित की जाती है उसके परिणाम भी उतने बेहतर रहते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्वच्छता अभियान है जो जनआंदोलन बन चुका है। जागरण के मंच पर परिचर्चा के लिए पहुंचे शहर के प्रबुद्ध वर्ग ने कहा कि यूटी प्रशासन इसी बात में पीछे है। यहां लोगों से सुझाव लेना तो दूर जो एडवाइजरी के लिए कमेटियां बनी हैं, उनमें भी सुझाव तक नहीं लिए जाते।

फ्लाईओवर शहर के लिए कितना जरूरी विषय पर बुलाई गई परिचर्चा के मंच पर शुक्रवार को प्रशासन में अपनी सेवाएं दे चुके वरिष्ठ अधिकारी, इंडस्ट्रियलिस्ट्स, ट्रेडर्स, सीनियर एडवोकेट्स, आर्किटेक्ट्स, सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि, एनवायरमेंटलिस्ट्स, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक पहुंचे। ये सभी व्यक्ति अपने क्षेत्र में किसी न किसी संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं। अधिकतर ने एक स्वर में दुख व्यक्त करते हुए कहा कि कोई भी प्लानिंग लोगों की सहभागिता के बिना कर ली जाती है। जिसके बाद प्रोजेक्ट पर पैसा भी बर्बाद हो जाता है और उसका कोई फायदा भी नहीं होता। इसके एक नहीं शहर में कई उदाहरण इन हस्तियों ने गिनाए।

प्रतिनिधियों ने कहा कि महिला भवन, मल्टीलेवल पार्किग, सेक्टर-17-16 को कनेक्ट करने वाला सबवे और कई बेसमेंट पार्किग करोड़ों रुपये बर्बादी का उदाहरण हैं। सीनियर एडवोकेट अजय जग्गा ने कहा कि अच्छा होता अगर फ्लाईओवर का फैसला लेने से पहले इसके डिजाइन पर कंपटीशन करवाया जाता। इसमें आर्किटेक्चर कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ आमजन से आइडिया मांगे जा सकते थे। मई गव पर ऐसे कंपटीशन होते रहते हैं। यह जनभागीदारी का बेहतर उदाहरण है। क्राफ्ड चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग तो हुई लेकिन उसमें उनसे सुझाव तक नहीं लिए गए। इसका फायदा क्या है। इस शहर का निर्माण करते समय इसकी खूबसूरती का ध्यान रखा गया। फ्लाईओवर से इसके हेरिटेज स्टेटस को नुकसान पहुंचेगा और ग्रीनरी के बीच कंक्रीट सुंदरता के लिए घातक होगा।

ट्रैफिक का सॉल्यूशन बायपास है। अंडरग्राउंड बाईपास बनाया जा सकता है जिससे बाहरी ट्रैफिक इसी का इस्तेमाल कर निकल सकें। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 तक पहुंच रहा है। ग्रीनरी की वजह से यह दूसरे शहरों के मुकाबले नियंत्रित है। 500 पेड़ कटे तो प्रदूषण इतना बढ़ेगा कि यहां भी सांस लेना मुश्किल होगा। यही समस्या मध्यमार्ग पर भी होगी तो क्या मध्यमार्ग पर भी फ्लाईओवर बनेगा। कुछ साल बाद इतने फ्लाईओवर होंगे कि इसे सिटी ब्यूटीफुल की जगह सिटी ऑफ फ्लाईओवर्स कहा जाने लगेगा।

-वीके भारद्वाज, पूर्व चीफ इंजीनियर, चंडीगढ़

बिना प्लानिंग और लोगों की राय के कोई प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो बर्बादी की मिसाल बन गए हैं। इनमें सेक्टर-16-17 का सबवे, मल्टीलेवल पार्किग, कई बेसमेंट पार्किग फेल हो चुकी हैं। लोगों के पैसे को बेवजह बर्बाद किया जा रहा है। बनाने से पहले प्रोजेक्ट पर परिचर्चा हो तो शायद शहर के लिए बेहतर होगा। फ्लाईओवर भी इसी श्रेणी में शामिल होगा। ट्रैफिक का सॉल्यूशन फ्लाईओवर नहीं बल्कि बेहतर मैनेजमेंट प्लान है।

-नीरज बजाज, अध्यक्ष, सेक्टर-17 बिजनेस प्रमोशन काउंसिल

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