जागरण संवाददाता, पंचकूला :

हरियाणा में सूक्ष्म सिचाई करने वाले किसानों की मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पीठ थपथपाई और बधाई दी। मंगलवार को सीएम ने प्रगतिशील किसानों से मुलाकात की और कई किसानों से आनलाइन बातचीत की। तरावड़ी, जिला करनाल निवासी मनोज कुमार ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इस वर्ष मिकाड़ा के तहत सूक्ष्म सिचाई का इस्तेमाल एक एकड़ भूमि पर किया। इसमें धान की फसल लगाई हुई है, जिससे 50 से 60 प्रतिशत पानी की बचत के साथ-साथ खेत के मजदूरी का पैसा भी बचा है।

उन्होंने बताया कि मैंने सिर्फ जीएसटी का 18 हजार रुपये ही भरा था, बाकी का सारा खर्च 82 से 83 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया गया है। डीएसआर विधि से 50 से 30 प्रतिशत पानी की बचत होती है।

जिला फतेहाबाद निवासी किसान अशोक रत्ताखेड़ा ने बताया कि उन्होंने सूक्ष्म सिचाई का सिस्टम एक एकड़ में लगवाया है, जिससे 50 प्रतिशत से अधिक पानी की बचत होती है और इस बार अपनी सारी जमीन पर सूक्ष्म सिचाई की व्यवस्था करना चाहता हूं।

अंबाला निवासी प्रगतिशील किसान बलबीर सिंह ने अपने खेत से मुख्यमंत्री से सीधी बात करते हुए बताया कि 2019-20 में सिचाई विभाग की टीम आई थी, जिन्होंने मुझे यह प्रोजेक्ट लगाने की सलाह दी। मैंने दो एकड़ गन्ने की फसल में यह प्रोजेक्ट लगवाया और पिछले वर्ष धान की खेती में भी इसका उपयोग किया। सूक्ष्म सिचाई से किसान को पानी व बिजली की बचत के साथ-साथ फसल की अधिक पैदावार भी होती है।

यमुनानगर के हुक्कम सिंह ने बताया कि वह 21 एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिचाई से खेती कर रहा है। इसमें गन्ना और धान की फसल कर रहा है। उन्होंने बताया कि पहले एक ट्यूबवेल से 8 घंटे में एक एकड़ में पानी फिरता था, लेकिन अब सूक्ष्म सिचाई के कारण एक घंटे में पांच एकड़ फसल में पानी फिरता है। इससे पानी के साथ बिजली की भी बचत हो रही है। जिला कुरुक्षेत्र के लखविदर सिंह ने बताया कि सूक्ष्म सिचाई पानी बचाने के लिए बहुत अच्छी योजना है क्योंकि इससे भविष्य में आने वाली पीढि़यों को पानी मिल सकेगा। यह एक यूनीक आइडिया है जो हमारी भावी पीढ़ी को बचाने के लिए काम कर रहा है। वह घर का पानी व छत के पानी को पाइप के माध्यम से खेत में ले जाकर उसका भी सिचाई के लिए इस्तेमाल करता है।

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