Move to Jagran APP

हरियाणा सरकार के सुरक्षा तंत्र से निपटने को थी आंदोलनकारियों की पूरी तैयारी, बना रखी थी स्पेशल फोर्स

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हरियाणा के गृह विभाग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर विश्वास किया जाए तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर शंभू बार्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की किसी भी कार्रवाई का विरोध करने के लिए एक विशेष बल का गठन किया हुआ है। हरियाणा सरकार के अनुसार कि तथाकथित किसान यूनियनों का आंदोलन आक्रामक था।

By Jagran News Edited By: Jeet Kumar Thu, 11 Jul 2024 12:41 AM (IST)
हरियाणा सरकार के सुरक्षा तंत्र से निपटने को थी आंदोलनकारियों की पूरी तैयारी

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हरियाणा के गृह विभाग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर विश्वास किया जाए तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर शंभू बार्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की किसी भी कार्रवाई का विरोध करने के लिए एक विशेष बल का गठन किया हुआ है।

हरियाणा सरकार के अनुसार कि तथाकथित किसान यूनियनों का आंदोलन आक्रामक था, क्योंकि वे हर सूरत में दिल्ली की तरफ बढ़ने के इरादे से ट्रैक्टर/जेसीबी/पोकलेन लेकर आए थे और उनके पास घातक हथियार थे। वे राष्ट्र के खिलाफ नारे लगा रहे थे और विशेष रूप से घोषणा कर रहे थे कि उनकी मांगें नहीं मानने पर सरकार को सबक सिखाएंगे।

गृह विभाग ने हाईकोर्ट दिया हलफनामा

गृह विभाग की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में शंभू बार्डर क्रास करने के इरादे से इकट्ठा हुए आंदोलनकारियों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारी दी गई है।

हलफनामे में कहा गया है कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक), भारतीय किसान मजदूर समन्वय समिति (बीकेएमसीसी) और हरियाणा के सभी जिलों के संगठनों/यूनियनों के आह्वान पर आंदोलनकारियों, उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों ने इरादतम सड़कों तथा मार्गों को अवरुद्ध करने की योजना बनाई हुई थी। वे जिला अंबाला की क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर तनाव, परेशानी, कानून और व्यवस्था की स्थिति बाधित करने के साथ ही फोर्स को चोट पहुंचाने और मानव जीवन और संपत्ति को खतरा पहुंचाने का इरादा रखते थे।

हरियाणा सरकार के गृह विभाग के विशेष सचिव महावीर कौशिक की ओर से हाई कोर्ट में यह हलफनामा दायर किया गया था। अदालत ने इस केस की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को हलफनामा प्रस्तुत करने के लिए कहा था, जिसमें यह विवरण दिया गया था कि राजमार्ग कब बंद किया गया था और उक्त स्थिति कब तक जारी रहेगी।

शंभू सीमा पर नाकेबंदी को उचित ठहराते हुए राज्य के हलफनामे में कहा गया है कि फरवरी में संसद की ओर बढ़ने के लिए पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के आने की संभावना थी, इसलिए आम जनता के हित में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए गए थे, जिसमें निषेधाज्ञा जारी करना भी शामिल था, ताकि सार्वजनिक शांति और सौहार्द के हित में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से अवैध आवाजाही की अनुमति न दी जा सके।

आंदोलनकारियों के पथराव से बचने को चलानी पड़ी गोलियां

गृह विभाग ने यह भी बताया कि 13 फरवरी और उसके बाद तलवार, भाला, लाठी डंडा, गंडासी समेत कई हथियारों से लैस लगभग 15-20 हजार आंदोलनकारियों ने मोडीफाई (संशोधित) ट्रैक्टरों/जेसीबी/पोकलेन की मदद से बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की, जिससे हरियाणा के अधिकार क्षेत्र में बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचा।

सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाने से बचने की चेतावनी दी, लेकिन उन्होंने वहां तैनात सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया, जिस कारण तीन डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सरकार ने कहा कि अपनी जान बचाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भीड़ को तितर-बितर करने हेतु पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन जब भारी पथराव शुरू हुआ, तो सुरक्षा बलों की जान बचाने के लिए रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा।

2020 के आंदोलन में देश का नाम खराब हुआ

गृह विभाग के हलफनामे में कहा गया है कि 2020-21 के किसान आंदोलन में किसान यूनियनों/किसान संगठनों के सदस्य हजारों ट्रैक्टर/ट्रालियों में राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से दिल्ली पहुंचे और उन्होंने एनसीआर दिल्ली के क्षेत्र में सभी सड़कों को भी अवरुद्ध कर दिया। दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में दंगे किए और लाल किले से देश का राष्ट्रीय ध्वज भी हटा दिया। इन आंदोलनकारियों ने तब लाल किले पर अपना धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किया था।

लाल किले का मामला पूरे दिन में फैल गया था

उपद्रवियों ने पुलिस बल पर भी हमला किया और लाल किले के क्षेत्र में कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। घटना से जुड़ी खबरें दुनिया भर में फैल गईं और देश का नाम खराब हुआ। गृह विभाग के अनुसार पिछले आंदोलन के दौरान करीब 13 महीने तक किसान आंदोलन के नाम पर मौजूद उपद्रवियों के खिलाफ दुष्कर्म, हत्या, गंभीर चोट आदि जैसे 36 गंभीर आपराधिक मामले/एफआईआर दर्ज किए गए थे।