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सुप्रीम कोर्ट से पंजाब के मुख्य सचिव को बड़ी राहत, अवमानना कार्रवाई पर रोक; मार्च 2027 तक मांगा DA बकाए का प्लान

Published: Thu, 05 Nov 2026 02:40 PM (IST)

पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से डीए बकाया मामले में बड़ी राहत मिली है, जहां आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।

डीए मामले में पंजाब के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाई कोर्ट की अवमानना कार्यवाही पर लगाई रोक।

डीए मामले में पंजाब के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, हाई कोर्ट की अवमानना कार्यवाही पर लगाई रोक।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाई।

  2. पंजाब सरकार को डीए भुगतान योजना पेश करने का निर्देश।

  3. मार्च 2027 तक बकाया भुगतान की योजना मांगी।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) के मामले में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

साथ ही सिविल अवमानना मामले में भी सरकार और अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस राहत के साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार को बकाया डीए के भुगतान के लिए ठोस योजना पेश करने को कहा है।

मार्च 2027 तक भुगतान की योजना मांगी

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह मार्च 2027 तक कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित बकाये के भुगतान की योजना अदालत के सामने रखे। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वर्तमान में डीए की दर 53 प्रतिशत है।

अदालत ने सरकार से पूछा कि वह बकाया राशि में से कितनी रकम जारी कर सकती है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए और भुगतान को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।

तीन अगस्त के आदेश का पालन नहीं करने पर शुरू हुई थी अवमानना

दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने तीन अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए/डीआर) की किस्तें उसी दर से जारी करे, जिस दर से राज्य में कार्यरत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को भुगतान किया जा रहा है।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किए बिना सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-जरूरी खर्च नहीं कर सकती। पंजाब सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश पर अमल नहीं होने के कारण अधिकारियों के खिलाफ सिविल और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू हो गई।

मुख्य सचिव को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश

12 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने इस बात पर भी गंभीर आपत्ति जताई थी कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की अपील दाखिल करने को लेकर कथित तौर पर गलत तथ्य पेश किए गए।

इसके अलावा वित्त सचिव की ओर से विभागाध्यक्षों को हाई कोर्ट के तीन अगस्त के आदेश पर अमल नहीं करने संबंधी निर्देश जारी किए जाने का मामला भी अदालत के संज्ञान में आया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 12 और 30 अक्टूबर के हाई कोर्ट के आदेशों का अवलोकन करने के बाद आपराधिक अवमानना की आगे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। अदालत ने सिविल अवमानना मामले में भी किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

इस दौरान सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर पीठ ने कुछ कड़ी टिप्पणियां भी कीं। अदालत ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को निजी और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की तुलना में विशेष सुविधाएं प्राप्त हैं। ऐसे में उनके कामकाज में जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

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