जेएनएन, चंडीगढ़। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा इस्तीफा रद किए जाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को जाखड़ आक्रामक और अफसरशाही से खफा दिखे।कहा कि विधायक जनता के बीच से चुनकर आते हैं और राज अफसर कर रहे हैं। अफसरों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। महात्मा गांधी के 150वेंं जन्मदिन को मनाने, देश में आर्थिक बदहाली को लेकर सड़कों पर उतरने, पार्टी की मेंबरशिप अभियान शुरू करने जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस के विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद जाखड़ ने कहा कि अफसरों के हाथ से पावर लेकर लोगों के हाथ में पावर जानी चाहिए।

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब जाखड़ ने गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर जहां अकाली दल की खिंचाई की, वहीं उन्होंने सरकार का समर्थन भी किया। प्रकाश पर्व को लेकर सिख संगत में यह संदेश जाने कि सरकार और एसजीपीसी अलग-अलग तौर पर प्रकाश पर्व मना रही है को लेकर जाखड़ ने कहा कि सरकार एसजीपीसी को पूरा सहयोग दे रही है।

पूर्व में मनाए गए प्रकाश पर्व की कमान एसजीपीसी के हाथों में के सवाल पर जाखड़ ने कहा कि तब एसजीपीसी पिट्ठू नहीं थी। पंजाब सरकार में 4 विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार और 2 विधायकों को प्लानिंग बोर्ड में एडजस्ट करने को लेकर जाखड़ ने कहा कि आज जो लोग इस फैसले पर किंतु-परंतु कर रहे हैं उन्हें अपना इतिहास देख लेना चाहिए। जाखड़ ने कहा कि बादल सरकार में 21 मुख्य संसदीय सचिव और 5 सलाहकार लगे हुए थे, जबकि उसके मुकाबले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मात्र 4 सलाहकार लगाए हैं। कामकाज को गति देने के लिए इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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