जेएनएन, चंडीगढ़। केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता लेने के लिए मुफ्त बिजली को बंद कर किसानों के खातों में सीधी नगद अदायगी सेे राजनीति गरमा सकती है। पंजाब कैबिनेट में कल किए गए इस फैसले पर अकाली दल ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हालांकि यह योजना पहले से ही राज्य के छह ब्लॉकों में स्वैच्छिक रूप से चल रही है, लेकिन केंद्र सरकार के कहने पर इसे इस साल कम से कम पूरे एक जिले में लागू करने को कहा गया है।

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि कांग्रेस सरकार उस समय किसानों पर बोझ डालने के बारे में सोच भी कैसे सकती है जब प्राकृतिक आपदा, सरकारी लापरवाही से आर्थिकता के उतार चढ़ाव ने किसानों की कमर पहले से ही तोड़ रखी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह फैसला किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए उठाया पहला कदम है। यह निर्णय किसानों को दिनदहाड़े चौराहे पर फांसी देने के समान है।

सुखबीर ने कहा कि जो सरकार अपने कर्मचारियों को मेडिकल भत्तों का भुगतान समय पर नहीं कर रही, उस सरकार पर कोई विश्वास कैसे कर सकता है। बादल ने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार ने कैबिनेट के इस निर्णय को असली रूप देने का प्रयास किया तो शिअद मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। इस मुद्दे पर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बादल ने कोर कमेटी की 30 मई को बैठक बुलाई है।

बिजली के बिल लगाए तो विरोध करेंगे : राजेवाल

भाकियू के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अगर सरकार ने खेती के टयूबवेलों पर बिजली के बिल लगाए तो यूनियन उसका तीखा विरोध करेगी। उन्होंने कैप्टन सरकार पर हर वादे से पलटने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि चुनाव से पहले पूरा कर्ज माफ करने के वादे का क्या हुआ? राजेवाल ने केंद्र के इस फैसले की भी निंदा की है कि उन्होंने राज्य सरकार को कर्ज देने के लिए यह शर्त लगाई है कि वह किसानों पर बिजली के बिल लगाए, तभी कर्ज मिलेगा।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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