जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : आर्थिक मंदी से जूझ रहे शहर के व्यापारियों के लिए एक बुरी खबर है कि इस बार फेस्टिवल सीजन में वह अपनी दुकानों के बाहर स्टाल नहीं लगा पाएंगे। जबकि इस माह तीन बड़े त्योहार हैं जिसमें हर साल व्यापारियों को पर्व से तीन दिन पहले अपनी दुकान के बाहर स्टाल लगाकर कारोबार करने की मंजूरी दी जाती थी लेकिन इस बार पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में अतिक्रमण का मामला विचाराधीन होने के कारण नगर निगम के अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर स्टाल और फड़ी लगाने की मंजूरी न देने का निर्णय लिया है। इससे जहां व्यापारियों को नुकसान होगा, वहीं, नगर निगम को भी फाइनेंशियल नुकसान है। नगर निगम हर साल फेस्टिवल सीजन में बाजारों में स्टाल और फड़ी लगाने की मंजूरी देकर लाखों रुपये कमाता रहा है। इस माह दशहरा, करवा चौथ और दिवाली तीन बड़े पर्व हैं। व्यापारियों ने मंगवा लिया है लाखों का सामान

फेस्टिवल सीजन को देखते हुए शहर के सैकड़ों व्यापारियों ने स्टाल पर माल बेचने के लिए लाखों रुपये का सामान भी मंगवा लिया है। व्यापारियों के अलावा फड़ी वाले शुल्क अदा करके स्टाल की मंजूरी लेते हैं। जबकि दो साल पहले नगर निगम ने दिवाली से तीन दिन के बजाय सात दिन की भी स्टाल लगाने की मंजूरी दे दी थी। हाई कोर्ट ने गैर रजिस्टर्ड वेंडर्स को दिए हैं हटाने के आदेश

इस समय पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने गैर रजिस्टर्ड वेंडर्स को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार स्टाल लगाने की जिन्हें मंजूरी दी जाती है, वह भी गैर रजिस्टर्ड ही हैं। अधिकारियों ने यह निर्णय लेने के साथ ही इस मामले में लॉ अधिकारी से कानूनी राय मांग ली है। ऐसे में इस मामले में नगर निगम ने सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल से भी लिखित में राय मांग ली है। फेस्टिवल सीजन में व्यापारी ड्राई फ्रूट, फूल, बर्तन, मिठाइयां, गिफ्ट आइटम के अलावा दूसरा सामान बाजारों में स्टाल लगाकर बेचते हैं। सबसे ज्यादा स्टाल लगाने के लिए सेक्टर-17, 22, 15, 19, 35 में मारामारी रहती है। व्यापारी अपनी दुकानों के बाहर टैंट लगाकर स्टाल लगाते हैं। शहरवासियों में भी स्टाल लगने से बाजारों में शॉपिग करने का क्रेज रहता है। ऐसा नहीं होना चाहिए, मेयर से मुलाकात की है : चरणजीव

व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह का कहना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। स्टाल की मंजूरी न देने से व्यापारियों को काफी नुकसान है। व्यापारी पूरा साल फेस्टिवल सीजन का इंतजार करते हैं। इस मामले में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल मेयर राजेश कालिया से मिला है। लोगों में भी फेस्टिवल सीजन में शॉपिग करने का क्रेज रहता है। व्यापारियों ने स्टाल के लिए माल बेचने के लिए लाखों रुपये का सामान भी मंगवा लिया था। कानूनी राय मांगी गई है

नगर निगम के विशेष कमिश्नर संजय झा का कहना है कि फेस्टिवल सीजन में दुकानों के बाहर स्टाल लगाने की मंजूरी देने के मामले में कानूनी राय मांगी गई है। करवा चौथ के लिए छह से आठ अक्टूबर के लिए मिले मंजूरी

करवा चौथ के लिए छह अक्टूबर से स्टाल और फड़ी लगाने की मंजूरी मिलनी चाहिए। इसके लिए नगर निगम बाकायदा शेड्यूल भी जारी कर चुका है। व्यापारी और फड़ी लगाने वाले अभी से स्टाल की मंजूरी के लिए नगर निगम में शुल्क अदा कर पर्ची कटवाने के लिए आना शुरू भी हो गए हैं। दिवाली के लिए नगर निगम हर साल स्टाल की मंजूरी के लिए 10 दिन पहले कैंप भी लगाता है। लेकिन अब इस निर्णय के बाद कैंप नहीं लगाया जाएगा। नगर निगम हर साल पहले आओ पहले पाओ नीति के आधार पर स्टाल के लिए पर्ची काटता है। इस शुल्क पर स्टाल लगाने की दी जाती है मंजूरी

एरिया रेट (सर्विस टैक्स सहित)

20 वर्ग फुट तक 211

50 वर्ग फुट तक 421

100 वर्ग फुट तक 843

225 वर्ग फुट तक 1264

500 वर्ग फुट तक 2107

एक हजार वर्ग फुट तक 6330

स्माल फड़ी 633 सेक्टर-17 और 22 में दोगुना होता है चार्ज

उक्त रेट पर शहर के सभी बाजारों में स्टाल लगाने की मंजूरी दी जाती है लेकिन सेक्टर-17 और 22 में स्टाल लगाने वालों से उक्त के मुकाबले दोगुना शुल्क वसूला जाता है। सेक्टर-22 में स्टाल लगाने की सबसे ज्यादा मारामारी रहती है। पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस समय नगर निगम ने सेक्टर-22 में ही सख्ती की हुई है।

Posted By: Jagran

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