2232 दिनों से लगातार साइकिल चला रहे अंबाला के रुपेश बाली, आखिर क्या है मिशन?
अंबाला के सेवानिवृत्त एयरफोर्स सार्जेंट रुपेश बाली ने लगातार 1594वीं 100 किलोमीटर की साइकिलिंग सेंचुरी पूरी कर उमेश पटेल का रिकॉर्ड तोड़ा है।

2231 दिन लगातार साइकिल चलाकर बनाया कीर्तिमान।
HighLights
रुपेश बाली ने 1594 लगातार 100 किमी साइकिलिंग सेंचुरी पूरी की।
उमेश पटेल का 1593 सेंचुरी का रिकॉर्ड तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
मौसम, बीमारी, हादसों के बावजूद साइकिलिंग का जुनून नहीं छोड़ा।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। बारिश हो या कड़ाके की सर्दी, तेज गर्मी हो या बीमारी और हादसा... साइकिलिंग का जुनून अंबाला के सेवानिवृत्त एयरफोर्स सार्जेंट रुपेश बाली को लगातार आगे बढ़ाता रहा।
ट्राइसिटी के सेंचुरी राइडर रुपेश बाली ने सोमवार को अपनी 1594वीं लगातार 100 किलोमीटर की सेंचुरी पूरी कर ठाणे के उमेश पटेल के 1593 लगातार सेंचुरी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का दावा किया है। इसके साथ ही वह 2231 दिन लगातार साइकिल चलाने का कीर्तिमान बनाने का भी दावा कर रहे हैं।
रुपेश बाली के अनुसार, इस लंबे सफर में मौसम के साथ कई मुश्किलें भी आईं, लेकिन उन्होंने साइकिलिंग का सिलसिला नहीं टूटने दिया। करीब 10 बार कार और बाइक से हादसे होने के बावजूद उन्होंने साइकिल चलाना जारी रखा।
तेज बुखार और दस्त जैसी बीमारी के दौरान भी उन्होंने 100 किलोमीटर की सेंचुरी पूरी की। कई बार एक ही दिन में चार-चार बार साइकिल पंचर होने के बावजूद उनका लक्ष्य नहीं रुका।
पिता के निधन पर भी पूरी की सेंचुरी
रिकॉर्ड यात्रा का सबसे भावुक दिन उनके पिता स्व. बलदेव कुमार बाली के निधन का रहा। उनके पिता भी छह दशक से अधिक समय तक साइकिल चलाते रहे और उनके लिए प्रेरणास्रोत थे। पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करने के बावजूद रुपेश ने उसी दिन 100 किलोमीटर साइकिल चलाई और सेंचुरी का सिलसिला जारी रखा।
अयोध्या तक साइकिल से सफर
रुपेश बाली के अनुसार, वह अंबाला और ट्राइसिटी से अयोध्या तक साइकिल से जाकर वापस लौटने वाले पहले साइकिलिस्ट भी हैं। अब तक वह ट्राइसिटी और अंबाला क्षेत्र में 1,96,285 किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं। इस वर्ष अब तक 29,658 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। वह आठ एसआर (SR) खिताब हासिल करने का भी दावा करते हैं।
जागरूकता को भी बनाया मिशन
रुपेश का कहना है कि साइकिलिंग उनके लिए केवल रिकॉर्ड बनाने का माध्यम नहीं है। वह लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों में भी जाते हैं।
चंडीगढ़ के साइकिलिंग समूह साइकिलगिरी और अंबाला के विभिन्न साइकिलिंग समूहों से जुड़े रुपेश रोजमर्रा के कई काम भी साइकिल से ही करते हैं। उनका कहना है कि साइकिल अब उनके लिए सिर्फ सवारी नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
