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अमृतसर की डॉ. स्वराज ग्रोवर ने 58 वर्षों में बचाए 25000 से अधिक बिखरते परिवार, समाज सेवा को समर्पित की पेंशन

By Gagandeep SharmaEdited By: Prince Sharma
Published: Tue, 15 Sep 2026 02:54 PM (IST)

अमृतसर में 'निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र' ने 58 वर्षों में 25000 से अधिक टूटे परिवारों को फिर से जोड़ा है ...और पढ़ें

अमृतसर के डॉ. स्वराज ग्रोवर ने बचाए 25000 से अधिक बिखरते परिवार (फाइल फोटो)

अमृतसर के डॉ. स्वराज ग्रोवर ने बचाए 25000 से अधिक बिखरते परिवार (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 'निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र' ने 58 वर्षों में 25,000 से अधिक परिवार जोड़े

  2. डॉ. स्वराज ग्रोवर ने 20,000 से अधिक महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाया

  3. संस्थापक अपनी पेंशन से केंद्र चलाती हैं, घर को वृद्धाश्रम बनाएंगी

गगनदीप शर्मा, अमृतसर। समाज सेवा के क्षेत्र में कई संस्थाएं काम कर रही हैं, लेकिन कुछ संस्थाएं अपने काम से मिसाल बन जाती हैं। अमृतसर में 'निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र' ऐसी ही संस्था है, जिसकी शुरुआत 2 जनवरी 1968 को एक घरेलू हिंसा की घटना से हुई।

आज 58 साल बाद संस्था 25 हजार से अधिक टूटे परिवारों का पुनर्मिलन करवा चुकी है। साथ ही 20 हजार से अधिक महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने का काम भी किया है। संस्था के साथ इस समय देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 2500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।

अमृतसर के रंजीत एवेन्यू निवासी संस्था की संस्थापक राष्ट्रपति अवार्डी एवं सेवानिवृत प्रिंसिपल डॉ. स्वराज ग्रोवर बताती हैं कि वर्ष 1968 में उनका विवाह प्रमोद ग्रोवर से हुआ था।

वह होशंगाबाद, अब नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) स्थित सुरक्षा कागज कारखाना में अधिकारी थे। उनके साथी ने एक दिन हमें घर में खाने पर बुलाया। कुछ देर में वहां चीख की आवाजें आनी शुरू हों गई।

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दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान डॉ. स्वराज ग्रोवर। जागरण

पूछने पर पता चला कि पड़ोस में रहने वाला व्यक्ति अपनी पत्नी को रोज मारता-पीटता था। कई बार उसे बांधकर काम पर चला जाता था, ताकि कुछ खा-पी भी न सके। इसके बाद मैं उसके घर पर पहुंच गईं। दरवाजा खुलते ही खून से लथपथ महिला मेरे गले लगकर रोने लगी और बोली कि मुझे यहां से निकाल लें, वरना पति जान से मार देगा।

मैंने पहले उसे डिस्पेंसरी पहुंचाकर उपचार करवाया और फिर अपने घर ले आई। मुझे डर था कि पति इस पर नाराज होंगे, लेकिन प्रमोद ग्रोवर ने डांटने के बजाय मेरी सराहना की।

बाद में महिला के पति को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पत्नी से माफी मांगकर उसे घर ले गया। यही घटना 'निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र' के जन्म की वजह बनी।

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अमृतसर में एक मीटिंग के दौरान संस्था की सदस्य। सौ. संस्था

संस्था किसी सदस्य से मेंबरशिप के नाम पर पैसा नहीं लेती। पीड़ित परिवार से भी कोई शुल्क नहीं लिया जाता। डा. ग्रोवर अपनी पेंशन में से जीवन-निर्वाह के लिए केवल 8-10 हजार रुपये निकालकर बाकी राशि संस्था को समर्पित कर देती हैं, जो सालाना पांच लाख रुपये से अधिक बनती है।

78 वर्षीय डा. ग्रोवर बताती हैं कि उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा अपने पिता स्व. घनश्याम दास से मिली, जो श्री राम आश्रम स्कूल में हेडमास्टर थे। वह 13 साल की उम्र में छठी कक्षा में पढ़ती थीं।

स्कूल से घर लौटते समय शिवाला फाटक के पास झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को भीख मांगते देख उन्हें दुख होता था। एक दिन वहीं बैठकर उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया। घर पहुंचकर जब पिता को बताया तो उन्होंने डांटने के बजाय खुशी जताई।

पहले बनाई स्थानीय समितियां, फिर दूसरे राज्यों से तालमेल

डॉ. स्वराज ग्रोवर बताती हैं कि शुरु तो उन्होंने अकेले की। हालांकि जब कुछ महिलाओं की मदद की तो वे भी उनके साथ जुड़ीं।

इसके उन्होंने पहले स्थानीय महिला समितियां बनाकर जमीनी स्तर पर काम का नेटवर्क तैयार किया। अलग-अलग स्थानों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है।

इसके बाद कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने उनसे खुद संपर्क किया और अन्य राज्यों तक भी यह मुहिम पहुंची। धीरे-धीरे यह काफिला बढ़ता गया। खास बात ये है कि कभी संस्था से मदद पाने वाली महिलाएं भी आगे चलकर दूसरी पीड़ित महिलाओं की मददगार बनीं।

डायमंड सेट भी कर दिया वापस

जालंधर की एक विवाहिता के मामले के बारे में बताते हुए डा. ग्रोवर कहती हैं कि महिला का पति नशे का आदी था और अक्सर उसके साथ मारपीट करता था।

करीब एक साल तक प्रताड़ना झेलने के बाद महिला मायके चली गई और जीवन समाप्त करने तक का फैसला कर लिया। संस्था के प्रयास से पति-पत्नी के बीच सुलह हुई और घर उजड़ने से बच गया। करीब एक साल बाद बच्चा होने पर परिवार उनसे मिलने आया और उपहार में डायमंड का कीमती सेट दिया। उन्होंने बिना देर किए उसे लौटा दिया। उनका मानना है कि जिस दिन किसी से उपहार ले लिया, उस दिन ईश्वर समाज सेवा की शक्ति छीन लेगा।

घर को वृद्धाश्रम या गुरुकुल बनाने का संकल्प

संस्था के प्रयासों से हजारों महिलाओं और युवतियों को घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों से बाहर निकालकर उनके अधिकार दिलाए गए हैं।

भंडारी पुल पर करीब एक साल तक संघर्ष कर संस्था ने जौड़ा फाटक पर चर्चित रेल हादसे में मारे गए 34 लोगों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।

डॉ. ग्रोवर अब अपने रंजीत एवेन्यू स्थित घर को मृत्यु के बाद वृद्धाश्रम या गुरुकुल बनाने की घोषणा कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि स्वयं इसकी घोषणा करने का साहस नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने अपने बेटे पियूश ग्रोवर से यह घोषणा कराई, जो इस समय सिडनी (आस्ट्रेलिया) में हैं।

दहेज व बाल विवाह के खिलाफ भी करती हैं जागरूक

डॉ. स्वराज ग्रोवर के नेतृत्व में निःशुल्क परिवार परामर्श केंद्र पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, दहेज, बाल विवाह जैसे मुद्दों पर काम करता हैं। संस्था जरूरतमंद महिलाओं को परामर्श के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भी करती है। इसके लिए सिलाई केंद्र चलाने और महिलाओं को सिलाई मशीनें उपलब्ध कराने जैसे प्रयास किए गए।