जेएनएन, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया से माफी मांगना पंजाब में आम आदमी पार्टी को बहुत भारी पड़ गया है। पंजाब आप में आया भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है और पंजाब में पार्टी का अस्तित्व ही खत्म होने की कगार पर है। पाटीं के बागी विधायक और नेता पंजाब में अाप से अलग होकर नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं। पंजाब में आप के 20 विधायकों में से 15 बागी हो चुके हैं। दूसरी ओर, तीन आम विधायकों ने दिल्‍ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की।

बताया जाता है कि केजरीवाल समर्थक तीन विधायकों ने शनिवार को दिल्‍ली में अरविंद केजरीवाल से उनके घर पर मुलाकात की।  इस अवसर पर आप के पंजाब प्रभारी मनीष सिसौदिया भी मौजूद थे। केजरीवाल से तलवंडी साबो से आप विधायक बलजिंदर कौर, कोटकपूरा से विधायक कुलतार सिंह और रूपनगर से विधायक अमरजीत सिंह ने मुला‍कात की। ये तीनों वही विधायक हैं जिन्होंने शुक्रवार को चंडीगढ़ में अाप विधायक दल की बैठक में केजरीवाल पर भरोसा जताया था। इस बैठक में 15 विधायकों ने केजरीवाल का विरोध किया था और आप के केंद्रीय नेतृत्‍व से अलग होकर चलना चाहते थे।

बताया जाता है कि पंजाब आप में भूचाल के बाद पार्टी का केंद्रीय नेतृत्‍व सक्रिय हाे गया है। पार्टी के पंजाब प्रभारी और दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसौदिया पंजाब के अाप नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्‍व के पहल पर ही आप विधायकों की अरविंद केजरीवाल से मुलाकात हो रही है। इसमें पार्टी के पंजाब के वरिष्‍ठ नेता भी मौजूद रह सकते हैं।

पंजाब में आम आदमी पार्टी के अस्तित्‍व पर खतरा

केजरीवाल के फैसले से नाराज आप के बागी विधायकों ने नई पार्टी बनाने को लेकर कानूनी सलाह लेनी शुरू कर दी है। संभावना है कि अाज या अगले एक-दो दिनों में नई पार्टी किस रूप में होगी इसका खुलासा कर दिया जाएगा। पार्टी के प्रदेश प्रधान भगवंत मान और उप प्रधान अमर अरोड़ा अपने पदों से इस्‍तीफा दे चुके हैं और बैंस ब्रदर्स सिमरनजीत सिंह बैंस व बलविंदर सिंह बैंस ने आप से गठबंधन लिया है।

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आप की राष्ट्रीय इकाई से अलग होकर आप पंजाब या किसी नई पार्टी के बैनर तले आप के बागी विधायक वएकत्र हो सकते हैं। दलबदलू कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए आप के 15 विधायक एक मंच पर होने चाहिए। शुक्रवार को आप विधायक दल की बैठक में 15 विधायकों ने साफ कर दिया कि पंजाब में वे राष्‍ट्रीय इकाई से अलग राह पर चलेंगे।

2014 में लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल के साथ हाथ मिलाकर प्रदेश में आप के आने का रास्ता खोल दिया था। इसके चलते लोकसभा चुनाव में उम्मीद से कहीं ज्यादा चार सीटों पर आप के उम्मीदवार जीते थे। चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही धर्मवीर गांधी जैसे सांसदों ने केजरीवाल की नीतियों का डटकर विरोध शुरू कर दिया।

2017 तक पार्टी की प्रदेश में काफी पकड़ बन चुकी थी। नतीजतन पंजाब में सरकार बनाने का सपना देखते हुए केजरीवाल ने तत्कालीन कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर खुद के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित करनी शुरू कर दी थी। छोटेपुर के बाद गुरप्रीत घुग्गी के हाथ आई पार्टी की कमान और केजरीवाल के कट्टरपंथियों के साथ संबंधों को लेकर पंजाब के मतदाताओं ने आप को जनादेश नहीं दिया। नतीजतन सरकार बनाने का सपना देखने वाली आप को 20 विधायकों के साथ विपक्ष में बैठना पड़ा।

विधानसभा चुनाव में मतदान से कुछ ही समय पहले कथित आतंकी के घर पर रुकने के फैसले के बाद से केजरीवाल के खिलाफ पंजाब में शुरू हुई बगावत ने आखिरकार नशे के मामले में आरोप लगाने के बाद माफी मांगने से पार्टी का अस्तित्व ही खत्म कर दिया है।

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विधायकों के बागी तेवरों ने नई पार्टी की नींव रख दी है। उम्मीद की जा रही है कि शनिवार को इस बारे में दलबदलू कानून को लेकर राय लेने के बाद आप विधायक नया खुलासा कर सकते हैं। नई पार्टी कौन से होगी, क्या लोक इंसाफ पार्टी के साथ आप विधायक मिलेंगे या अपनी अलग पार्टी बनाएंगे जैसे सवालों को लेकर सुखपाल खैहरा ने कहा कि आमराय से फैसला लिया जाएगा।

केजरीवाल के पंजाब में लिए गए फैसले, जिन पर उठे सवाल

-विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले कट्टरपंथियों का समर्थन लेने की कोशिश

-विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कथित आतंकी के घर में रात्रि विश्राम करना

-पंजाब के हितों के मुद्दों की बजाय अपने हितों को देखना

-सुच्चा सिंह छोटेपुर को कनवीनर के पद से हटाना

-गुरप्रीत सिंह घुग्गी को भी कनवीनर के पद से हटाना

-भगवंत मान पर आंख मूदकर भरोसा करना और प्रधान बनाना

-एडवोकेट एचएस फूलका को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटने देना

-पंजाब को समझे बिना दिल्ली से बैठकर पंजाब के फैसले लेना

-अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से नशे को लेकर लगाए गए आरोपों पर माफी मांगना।

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भगवंत मान बोले, केजरीवाल के कदम से ठगा सा महसूस कर रहे कार्यकर्ता

संगरूर :  सांसद भगवंत मान ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अरविंद केजरीवाल द्वारा मजीठिया से माफी मांगने जैसा कदम उठाने से पहले पंजाब इकाई को भरोसे में नहीं लिया, जो कई सवाल खड़े करता है। केजरीवाल ने उन्हें न तो माफी मांगने की बात बताई और न ही इस पर भरोसा लेने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि ड्रग तस्करी मामले की जांच देश की जांच एजेंसी कर रही है और नशे के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी। केजरीवाल के इस कदम से आम आदमी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। मैंने  इस्तीफा अपने जमीर की आवाज सुनकर ही दिया है।

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लिखित तौर पर नहीं दिया त्यागपत्र : चीमा

हलका दिड़बा के विधायक हरपाल चीमा ने कहा कि भगवंत मान ने पंजाब की प्रधानगी से इस्तीफा केवल सोशल मीडिया पर वायरल किया है, लिखित तौर पर नहीं दिया है। सभी विधायक व पार्टी के पदाधिकारी मान को मनाने का प्रयास करेंगे। सियासत में ऐसे अनेक मोड़ भी आ जाते हैं, जब व्यक्ति को कदम लेने पड़ते हैं।

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मान के साथ हूं : हेयर

बरनाला से आप विधायक गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि केजरीवाल के कदम से पार्टी को हानि हुई है। इससे वर्कर्स का मनोबल भी टूटा है, वह इसका विरोध करते हैं। केजरीवाल को प्रदेश के सभी सांसदों, विधायकों व जिला प्रधानों से विचार-विमर्श करके ही इतना बड़ा फैसला लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह भगवंत मान के साथ हैं।

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भगवंत मान को मनाएंगे : पंडोरी

आरक्षित सीट महलकलां से आप विधायक कुलवंत ङ्क्षसह पंडोरी ने भी केजरीवाल की माफी मांगने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश अध्यक्ष सांसद भगवंत मान से पूरी तरह सहमत हैं व उनका इस्तीफा नामंजूर करवाकर उन्हें फिर से कार्यरत रखेंगे।

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वर्कर्स की भावनाएं हुईं आहत : पिरमल

आरक्षित विधानसभा क्षेत्र भदौड़ से आप विधायक पिरमल सिंह खालसा ने कहा कि केजरीवाल ने माफी मांगने से पहले पंजाब के किसी नेता से राय नहीं ली थी। उनके माफी मांगने से पार्टी के वर्कर्स को मानसिक रूप से काफी आघात हुआ है। उन्होंने कहा कि वह सांसद भगवंत मान से पूरी तरह सहमत हैं व उनका समर्थन करते हैं।

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केजरीवाल फरेबी, पंजाब की जनता उसे माफ नहीं करेगी : छोटेपुर

कलानौर (गुरदासपुर) : अपना पंजाब पार्टी के प्रधान सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कहा कि आम आदमी पार्टी के संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल झूठे व फरेबी हैं। केजरी ने मजीठिया से माफी मांग कर पंजाब की नौजवान पीढ़ी के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने पंजाब के आप विधायकों को नसीहत दी कि वह केजरीवाल से अपना नाता तोड़ लें।

छोटेपुर ने कहा कि केजरीवाल ने चुनावों के दौरान पंजाब की स्टेजों पर हजारों बार बोला था कि मजीठिया नशे का व्यापारी है और नशे के मुद्दे पर पंजाब की नौजवान पीढ़ी को गुमराह करके पंजाब की जनता का करोड़ों रुपये का नुक्सान किया था। केजरीवाल ने माफी मांग कर अपना असली चेहरा लोगों के सामने लाया है।  केजरीवाल ने ऐसा ही करके दिल्ली की जनता से भी धोखा दिया है।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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