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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आप विधायक खैहरा बोले- राणा गुरजीत डिफाल्टर हैं, जब्त हो पासपोर्ट

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Fri, 02 Jun 2017 09:37 AM (IST)

आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल खैहरा ने एक बार फिर रेत खनन नीलामी मामले को लेकर राज्‍य के मंत्री ...और पढ़ें

आप विधायक खैहरा बोले- राणा गुरजीत डिफाल्टर हैं, जब्त हो पासपोर्ट
आप विधायक खैहरा बोले- राणा गुरजीत डिफाल्टर हैं, जब्त हो पासपोर्ट

जेएनएन, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा है कि सिंचाई व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह माइनिंग स्कैंडल के सरगना हैं और उनको बर्खास्त करने की जगह कैप्टन सरकार उन्हें क्लीन चिट देने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि राणा डिफाल्टर हैं और उनका पासपोर्ट जब्त होना चाहिए। खैहरा ने यह भी आरोप लगाया कि रेत बजरी खनन की बोली में खडूर साहिब से कांग्रेस विधायक रमनजीत सिंह सिक्की और शाहकोट के कांग्रेस नेता लॉडी समेत और भी सत्ताधारियों के बेनामी पैसे लगे हैं।

खैहरा ने यहां कहा कि राणा द्वारा अपने कथित रसोइया और नौकरों के नाम पर करोड़ों रुपये की बेनामी रेत बजरी के ठेके लेने के मामले में कैप्टन सरकार जस्टिस नारंग आयोग के माध्यम से जांच के नाम पर भद्दा मजाक कर रही है। उन्होंने कहा कि राणा पंजाब के उभरते हुए विजय माल्या हैं। इसलिए रेता बजरी के ठेकों में हुए घालमेल की हाईकोर्ट के मौजूदा जज से जांच करवाने के साथ-साथ दोबारा ठेके करवाए जाएं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि राणा उत्तर प्रदेश के किसानों के बड़े डिफाल्टर हैं। राणा को उत्‍तर प्रदेश की चार शुगर मिलों के जरिए किसानों के 202 करोड़ रुपये देने हैं। यूपी के गन्ना कमिश्नर विपिन कुमार द्विवेदी का हवाला देते हुए कहा कि राणा पर मुकदमा दर्ज हो चुका है और पासपोर्ट जब्त करने के अादेश भी हो चुके हैं। इसलिए राणा गुरजीत सिंह और उनके परिवार के पासपोर्ट तुरंत जब्त होने चाहिए ताकि यह विजय माल्या की तरह देश छोड़ कर न भाग जाएं। उन्होंने जस्टिस नारंग से अपील की है कि वह एक महीने की नौकरी की लालच को त्याग जांच आयाेगकी जिम्मेदारी से दूर हो जाएं क्योंकि उनके परिवार के राणा गुरजीत सिंह के साथ क्लाइंट के तौर पर संबंध जगजाहिर हो चुके हैं।

कमीशन की शर्तों व नियम पर सवाल

खैहरा ने कहा कि जस्टिस नारंग आयोग की जांच के लिए बनाई शर्तों में यह शामिल नहीं किया गया कि राणा के मामूली वेतन लेने वाले कथित रसोइया समेत दूसरे नौकरों के खातों में करोड़ों रुपये किस स्रोत से आए हैं। उन्होंने कहा कि राणा को वैसे ही क्लीन चिट दे दी जाएगी जैसे बादल सरकार ने पूर्व शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका को किताब घोटाले में से जस्टिस जिंदल आयोग के द्वारा क्लीन चिट दी थी।

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17 खड्ड एक बोली में दिए गए

खैहरा ने यह भी कहा कि रेत खनन की नीलामी में 17 खड्डों के ठेके रिजर्व प्राइज पर एक बोली में दे दिए गए हैं। यह कैसे संभव है कि एक ही बार बोली के बाद ठेका दे दिया जाए। नियमानुसार कम से कम तीन बोलियां जरूर लगनी चाहिए.  20 फीसद नीलामी सिंगल बोली पर करवा दी गई है। ऐसे में पूरी नीलामी प्रक्रिया पर ही सवाल लग गया है।