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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अयोध्‍या में लंगर लगाएंगे निहंग सिंह, चंडीगढ़ से राशन लेकर रवाना हुआ जत्‍था; बोले- 'भगवान राम के प्रति है सच्‍ची श्रद्धा'

Published: Sun, 07 Jan 2024 09:57 PM (IST)

Ram Mandir पंजाब के निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर द्वारा अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को होने वाले भव्य राम ...और पढ़ें

अयोध्‍या में लंगर लगाएंगे निहंग सिंह, चंडीगढ़ से राशन लेकर रवाना हुआ जत्‍था
अयोध्‍या में लंगर लगाएंगे निहंग सिंह, चंडीगढ़ से राशन लेकर रवाना हुआ जत्‍था

HighLights

  1. निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर द्वारा किया जाएगा लंगर का आयोजन
  2. गुरु नानक देव जी ने लगभग 15 वीं शताब्दी में लंगर की शुरूआत की थी।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर द्वारा अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को होने वाले भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के मौके पर लंगर का आयोजन किया जा रहा है। अयोध्‍या में पहुंचने वाले दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए लंगर के लिए चंडीगढ़ से राशन व अन्य साजो सामान के 2 ट्रकों को रवाना किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर अगुवाई 1858 में बाबरी ढांचे पर कब्जा कर हवन करने वाले निहंग बाबा फकीर सिंह के आठवें वंशज हैं।

पूर्वजों की श्री भगवान राम के प्रति रही है सच्‍ची श्रद्धा

आज सेक्टर 26 स्थित ग्रेन मार्किट से राशन के 2 ट्रकों का जत्था रवाना करते हुए निहंग बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने बताया कि ना सिर्फ उनके पूर्वजों की श्री भगवान राम के प्रति सच्ची श्रद्धा व आस्था रही है बल्कि उनकी भी उतनी ही है। साथ ही इसी कारण उन्होंने कहा कि अब जब 22 जनवरी 2024 को श्री राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही तो वे पीछे कैसे रह सकते हैं। इसलिए निहंग सिंहों के साथ अयोध्या में लंगर लगा देश विदेश से आने वाली संगत की सेवा करेंगे।

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लगभग 15 वीं शताब्दी में लंगर की हुई थी शुरूआत

निहंग बाबा ने बताया कि आगामी 14 जनवरी माघी के शुभ अवसर पर अयोध्या में लंगर सेवा कि शुरुआत कर दी जाएगी, जो कि निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि सिखों का लंगर कि सेवा करने का बहुत बड़ा इतिहास है। उन्होंने बताया कि आदि गुरु नानक देव जी ने लगभग 15 वीं शताब्दी में लंगर की शुरूआत की थी।

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गुरु नानक जहां भी गए, जमीन पर बैठकर ही भोजन करते थे। ऊंच-नीच, जात-पात और अंधविश्वास को समाप्त करने के लिए सभी लोगों के एक साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा शुरू की। तीसरे गुरु अमरदास जी ने लंगर की इस परंपरा को आगे बढ़ाया। इस मौके पर भाजपा नेता विनीत जोशी भी मौजूद रहे।