कैलाश नाथ, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे। वह संगठन में ही एक्टिव होंगे। जाखड़ ने एक बार फिर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने डिप्टी सीएम और इच्छा अनुसार विभाग लेने का विकल्प दिया था। सिख न होने के कारण मुख्यमंत्री पद से महरूम रहने वाले सुनील जाखड़ ने शुक्रवार को राहुल गांधी के साथ करीब 1 घंटे तक उनके निवास स्थान पर बैठक की। इस दौरान राहुल ने उन्हें डिप्टी सीएम बनने का प्रस्ताव दिया। जिसे उन्होंने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि पद की उन्हें लालसा नहीं है। डिप्टी सीएम बनकर वह अपनी अंतरआत्मा को नहीं मार सकते हैं।

जाखड़ ने इस मुलाकात के दौरान पंजाब के हरेक बिंदु को छुआ और खुलकर अपने विचार राहुल गांधी के सामने रखे। जाखड़ द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद राहुल ने इसी बैठक के बीच में ही पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल को भी बुला लिया। बैठक खत्म होने के बाद भी वेणुगोपाल जाखड़ को सरकार का हिस्सा बनने के लिए मनाते हुए नजर आए।

पार्टी के सूत्र बताते हैं कि जाखड़ जब अपनी गाड़ी पर बैठ रहे थे तब वेणुगोपाल उनके पास आए और उनसे बातचीत की, लेकिन जाखड़ ने उन्हें कह दिया कि उन्हें जो कुछ भी कहना था, वह राहुल गांधी को कह आए हैं। जाखड़ ने बातचीत करते हुए बताया कि उनकी बैठक बेहद शानदार माहौल में हुई। उन्होंने राहुल गांधी के सामने अपनी सारी बातें रखी और उन्होंने भी पूरे धैर्य से उनकी सारी बातों को सुना।

अहम बात यह है कि इन दोनों ही नेताओं के बीच करीब 1 घंटे तक वन-टू-वन बैठक चलती रही। बैठक के अंतिम क्षणों में केसी वेणुगोपाल पहुंचे थे। जाखड़ ने राहुल को कहा कि वह कांग्रेस को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं। अगर पार्टी उन्हें निकालना भी चाहे तो भी वह पार्टी को नहीं छोड़ेंगे। बता दें, दो दिन पूर्व दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश से चंडीगढ़ पहुंचे राहुल गांधी ने एयरपोर्ट पर ही जाखड़ को भी बुला लिया था। दोनों एक साथ दिल्ली गए थे। वीरवार को राहुल गांधी ने जाखड़ के साथ बैठक करनी थी, लेकिन यह बैठक शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे के करीब हुई।

पार्टी सूत्र बताते हैं कि जाखड़ ने पार्टी में ही काम करने का मन बना लिया है। यही कारण है कि आने वाले 2022 के चुनाव में कांग्रेस उन्हें न सिर्फ कंपेन कमेटी का चेयरमैन, बल्कि टिकटों के लिए बनने वाले स्क्रीनिंग कमेटी का भी सदस्य बना सकती है, जबकि जाखड़ की राज्यसभा में जाने की भी संभावना है।

तीन बार झटका खा चुके जाखड़

पूर्व केंद्रीय मंत्री व लोकसभा अध्यक्ष रहे स्व. बलराम जाखड़ के पुत्र सुनील जाखड़ को 2015 से लेकर 2021 तक तीन बड़े झटके लगे हैं। 2015 में कांग्रेस ने जाखड़ को कांग्रेस विधायक दल का नेता पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को सीएलपी बना दिया था। वहीं, पिछले दिनों कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ हुई बगावत में पार्टी ने जाखड़ से प्रदेश प्रधान का पद वापस लेकर नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश प्रधान बना दिया था। इसके बाद जब सीएम चुनने की बारी आई तो जाखड़ इसकी दौड़ में सबसे आगे थे। 40 विधायकों ने उनके नाम पर सहमति जताई थी, लेकिन सिख न होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।

Edited By: Kamlesh Bhatt