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प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों पर शिकंजा! पंजाब में 231 कंपनियों की तय होगी जवाबदेही, ऑडिट में खुला राज

Published: Mon, 12 Oct 2026 07:00 AM (IST)

पंजाब में प्लास्टिक प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए आयोजित समिट में 231 कंपनियों की जवाबदेही तय करने, आधुनिक तकनीक ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. प्लास्टिक प्रदूषण के लिए उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही तय।

  2. ब्रांड ऑडिट में 231 कंपनियों का प्लास्टिक कचरा उजागर।

  3. वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर।

राज्य ब्यूरो जागरण चंडीगढ़
पंजाब में प्लास्टिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए उत्पादक कंपनियों की जवाबदेही तय करने और कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया गया है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से मोहाली स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल पंजाब प्लास्टिक एक्शन समिट-2026 में छह प्रमुख शहरों में किए गए प्लास्टिक कचरे के ब्रांड ऑडिट के निष्कर्ष साझा किए गए। ऑडिट में करीब 7000 किलोग्राम नमूना कचरे की जांच की गई और लगभग 12 हजार पैकेटों को 231 कंपनियों से जोड़ा गया। इससे ब्रांडेड प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत सामने आई।

समिट में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, पंजाब विकास आयोग की उपाध्यक्ष सीमा बंसल, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशक डा. शैलेंद्र कौर, एलायंस टू एंड प्लास्टिक वेस्ट और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कागजी अनुपालन नहीं, जमीन पर दिखे नतीजे

मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने कहा कि चिप्स, बिस्कुट और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले मल्टी-लेयर प्लास्टिक (एमएलपी) का कबाड़ बीनने वालों के लिए बहुत कम या कोई आर्थिक मूल्य नहीं होता। इस कारण ऐसा कचरा अक्सर सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पड़ा रहता है।

समिट में राष्ट्रीय स्तर पर प्लास्टिक पुनर्चक्रण संबंधी अनुपालन और जमीन पर दिखाई देने वाले ब्रांडेड प्लास्टिक कचरे के बीच अंतर का मुद्दा भी उठा। मौजूदा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था में कंपनियां देश के दूसरे हिस्सों में प्रसंस्कृत प्लास्टिक कचरे के प्रमाणपत्रों के जरिये भी अपने दायित्व पूरे कर सकती हैं। ऐसे में खपत वाले राज्यों में पैदा होने वाले कचरे के प्रबंधन और कंपनियों के दावों की पारदर्शी निगरानी जरूरी है।

तकनीक से होगा कचरे का प्रबंधन

समिट में प्लास्टिक कचरे के संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने तथा टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। एलायंस टू एंड प्लास्टिक वेस्ट ने पंजाब में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता की संभावनाएं तलाशने की प्रतिबद्धता जताई।

पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा कि इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक को सुरक्षित तरीके से एकत्र करना, वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्कृत करना और जिम्मेदारी से निस्तारित करना जरूरी है। प्लास्टिक मिट्टी और पानी को दूषित न करे तथा खाद्य श्रृंखला में पहुंचकर मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा न बने, यही प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को केवल सरकार और सफाई कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। कंपनियों, संस्थानों और नागरिकों को भी भागीदारी निभानी होगी।

धार्मिक स्थलों से स्कूलों तक पहल

पीपीसीबी ने फतेहगढ़ साहिब में प्लास्टिक मुक्त लंगर, पटियाला के काली माता मंदिर में प्लास्टिक मुक्त प्रसाद और श्री आनंदपुर साहिब में प्लास्टिक मुक्त होला मोहल्ला की पहल की जानकारी दी। इन आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं ने स्टील और जैव अपघटनीय कटलरी का इस्तेमाल किया। इसके अलावा पटियाला के स्कूलों और कालेजों में प्लास्टिक मुक्त लंच अभियान और मल्टी-लेयर प्लास्टिक संग्रह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को जिम्मेदार उपभोग और कचरे को अलग-अलग एकत्र करने के लिए प्रेरित करना है।