पंजाब मंडी बोर्ड में 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
पंजाब मंडी बोर्ड में 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका ...और पढ़ें
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पहले से बनी सड़कों के दोबारा टेंडर और भुगतान का दावा।
HighLights
मंडी बोर्ड पर 500 करोड़ के घोटाले का आरोप
पहले बनी सड़कों के दोबारा टेंडर और भुगतान का दावा
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया
दयानंद शर्मा,चंडीगढ़। पंजाब मंडी बोर्ड में करीब 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से पहले ही बनाई जा चुकी सड़कों के निर्माण के लिए मंडी बोर्ड ने दोबारा टेंडर जारी किए और कथित तौर पर उन्हीं सड़कों के नाम पर दोबारा भुगतान भी किया गया।
याचिकाकर्ता ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दस मार्केट कमेटियों को मंडी बोर्ड के अधीन करने पर भी सवाल
गुरदासपुर निवासी रणजीत सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री के आदेशों के आधार पर दस मार्केट कमेटियों को पंजाब मंडी बोर्ड के अधीन कर दिया गया।
इसके बाद सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों में भी कथित अनियमितताएं की गईं। याचिका के अनुसार, जिन सड़कों का निर्माण पहले ही पीडब्ल्यूडी विभाग कर चुका था, उन्हीं सड़कों के निर्माण के लिए मंडी बोर्ड ने दोबारा टेंडर जारी कर दिए।
एक ही सड़क के निर्माण पर दो बार खर्च का आरोप
याचिकाकर्ता का दावा है कि कई सड़कों का निर्माण पहले पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से किया जा चुका था। इसके बावजूद मंडी बोर्ड ने उन्हीं सड़कों को दोबारा बनाने की प्रक्रिया अपनाई और कथित तौर पर भुगतान भी जारी कर दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह एक ही सड़क के निर्माण पर दो बार सरकारी धन खर्च किया गया, जिससे करीब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता हुई।
याचिका के अनुसार, 15 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई शीर्ष समिति की बैठक में लोक निर्माण विभाग और पंजाब मंडी बोर्ड के बीच ग्रामीण संपर्क सड़कों के कार्यों के बंटवारे पर विचार किया गया था।
बैठक में मार्केट कमेटियों के आधार पर पहले से लागू व्यवस्था को जारी रखने की सिफारिश की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बाद कई वर्षों तक इसी व्यवस्था के तहत काम होता रहा, लेकिन सितंबर 2026 में दस मार्केट कमेटियों के कार्य मंडी बोर्ड को स्थानांतरित करने का आदेश जारी कर दिया गया।
याचिका में बताया गया है कि 9 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद यह बदलाव किया गया। इसके बाद 16 और 21 सितंबर 2026 के कार्यालय आदेशों के माध्यम से काहनूवान और कलानौर सहित दस मार्केट कमेटियों के कार्य मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए।
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि कार्यों का हस्तांतरण करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी, तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय औचित्य का विधिवत परीक्षण किया गया था या नहीं।
इंजीनियर इन चीफ की भूमिका की जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने पंजाब मंडी बोर्ड के इंजीनियर इन चीफ जतिंदर भंगू की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में पूरे मामले की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच करवाने की मांग की गई है, ताकि कथित अनियमितताओं, जिम्मेदार अधिकारियों और सरकारी धन के इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट हो सके।
टेंडर और भुगतान रोकने की भी मांग
जनहित याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि मामले की जांच पूरी होने तक विवादित कार्यों से संबंधित नए टेंडर जारी करने और भुगतान करने पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसा करने से सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
हाई कोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार सहित सभी प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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