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17 साल बाद 80 वर्षीय बुजुर्ग को HC से मिला न्याय, पेंशन का बकाया न देने पर DEO, DTO और बैंकरों का वेतन रोका

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:01 AM (IST)

80 वर्षीय जगदीश राज अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से 17 साल बाद अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन बकाया भुगतान के लिए न्याय मिला।

17 वर्ष से पेंशन का बकाया नहीं मिला कोर्ट ने अधिकारियों का वेतन रोका।

17 वर्ष से पेंशन का बकाया नहीं मिला कोर्ट ने अधिकारियों का वेतन रोका।

HighLights

  1. 80 वर्षीय बुजुर्ग को 17 साल बाद पेंशन बकाया पर न्याय

  2. हाई कोर्ट ने अधिकारियों, बैंककर्मियों का वेतन रोकने का आदेश दिया

  3. दिवंगत पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन बकाया का मामला था

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 80 वर्षीय जगदीश राज अरोड़ा को बड़ी राहत दी है, जो करीब 17 साल से अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन के बकाया भुगतान के लिए सरकारी कार्यालयों और बैंक के चक्कर काट रहे थे।

कोर्ट ने अधिकारियों और बैंक के बीच जिम्मेदारी डालने पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अपने जायज हक के लिए भटकने के लिए मजबूर किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक पेंशन का बकाया भुगतान प्रभावी ढंग से हल नहीं किया जाता, संबंधित अधिकारी और बैंक बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे।

पत्नी की पेंशन के बकाया की थी मांग

यह मामला जगदीश राज अरोड़ा द्वारा वर्ष 2023 में दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन के बकाया भुगतान की मांग की थी। सुदर्शन कुमारी गुरदासपुर-द्वितीय में ब्लाक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी पत्नी की पेंशन का बकाया लगभग वर्ष 2007 से लंबित है। लगातार प्रयासों के बावजूद पेंशन वितरण प्राधिकरण और बैंक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जिससे बकाया राशि का भुगतान नहीं हो सका।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि पेंशन के बकाया पर याचिकाकर्ता के अधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है। गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने जवाब में कहा कि अकाउंटेंट जनरल, पंजाब के कार्यालय ने 24 सितंबर 2012 को जिला कोषाधिकारी को पत्र जारी किया था, लेकिन बैंक आफ इंडिया ने इसे लागू नहीं किया।

हाई कोर्ट ने उठाया सख्त कदम

वहीं, बैंक ने कहा कि जिला कोषाधिकारी की ओर से कुछ अनुपालन नहीं किए जाने के कारण बकाया पेंशन जारी नहीं की जा सकी। न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हैं और इसके बावजूद उन्हें अपने जायज हक के लिए भटकना पड़ा।

हाई कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के सचिवों को निर्देश दिया कि गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कोषाधिकारी कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे।

इसी तरह बैंक आफ इंडिया के उप महाप्रबंधक को भी निर्देश दिया गया कि संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक और शाखा प्रबंधक भी कोर्ट की अनुमति के बिना वेतन नहीं निकाल सकेंगे।

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