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'अकेली महिला भी IVF की हकदार, पति की उम्र नहीं बाध्यता'; पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:17 PM (IST)

50 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं अपने पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने पर भी स्वतंत्र रूप ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला। (एआई जनरेटेड फोटो)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. पति की उम्र 55 पार, फिर भी 50 साल से कम की महिला हकदार।

  2. सहायक प्रजनन तकनीक कानून के तहत स्वतंत्र अधिकार।

  3. हाईकोर्ट ने किया अलग-अलग छह याचिका का निपटारा।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। संतान की चाह रखने वाली उन महिलाओं के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है, जिनके पति निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 50 वर्ष से कम उम्र की महिला अपने पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के बावजूद इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) सहित सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) सेवाओं का स्वतंत्र रूप से लाभ उठा सकती है।

इसके लिए पति की निर्धारित आयु सीमा के भीतर होना अनिवार्य नहीं है। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत इन सेवाओं का लाभ या तो पति-पत्नी संयुक्त रूप से ले सकते हैं या महिला अपने स्तर पर भी इनका उपयोग कर सकती है।

किसी महिला की पात्रता को केवल इसलिए समाप्त नहीं किया जा सकता कि उसके पति ने 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष निर्धारित है। ये दोनों सीमाएं अलग-अलग लागू होती हैं।

यदि पति-पत्नी संयुक्त रूप से एआरटी सेवाएं लेना चाहते हैं और उनमें से कोई एक निर्धारित आयु सीमा पार कर चुका है तो दंपती के रूप में उपचार की पात्रता समाप्त हो जाती है। हालांकि, महिला को कानून के तहत मिला स्वतंत्र अधिकार बना रहता है, बशर्ते उसकी उम्र 50 वर्ष से कम हो।

अदालत ने कहा कि महिला विवाहित हो या अविवाहित, उसे स्वतंत्र रूप से एआरटी सेवाएं लेने का अधिकार दिया गया है। हाईकोर्ट ने यह फैसला अलग अलग छह याचिका का निपटारा करते हुए दिया।

नौ भ्रूण सुरक्षित रखने के बाद भी नहीं मिली उपचार जारी रखने की अनुमति

मामले की एक प्रमुख याचिका में एक दंपती ने आईवीएफ उपचार के लिए अधिकृत क्लीनिक से संपर्क किया था। 22 नवंबर 2023 को दोनों की उम्र 47 वर्ष थी। उपचार के दौरान नौ भ्रूण तैयार कर सुरक्षित रखे गए थे। जुलाई 2024 और फरवरी 2025 में दो बार भ्रूण प्रत्यारोपण किया गया, लेकिन गर्भावस्था आगे नहीं बढ़ सकी।

इसके बाद चार भ्रूण सुरक्षित बचे थे। इस बीच महिला ने 10 दिसंबर 2025 को 50 वर्ष की आयु पूरी कर ली। दंपती ने शेष भ्रूणों के इस्तेमाल की अनुमति मांगते हुए दलील दी कि जब भ्रूण तैयार किए गए थे, तब दोनों निर्धारित आयु सीमा के भीतर थे।

अदालत ने कहा कि निर्धारित आयु सीमा पार करने के बाद केवल इस आधार पर उपचार का अगला चरण जारी रखने का अधिकार नहीं मिल सकता कि भ्रूण उस समय सुरक्षित कर लिए गए थे, जब दंपती पात्र थे।

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