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पूर्व CM बेअंत सिंह के हत्यारे राजोआना को मिलेगी फांसी? केंद्र ने SC में सजा माफी का किया विरोध, अब 28 को होगी सुनवाई

By Rohit KumarEdited By: Prince Sharma
Published: Thu, 08 Oct 2026 10:14 AM (IST)

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्व पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का विरोध किया है।

पूर्व सीएम बेअंत सिंह की आत्मघाती हमले में हुई थी हत्या (फाइल)

पूर्व सीएम बेअंत सिंह की आत्मघाती हमले में हुई थी हत्या (फाइल)

HighLights

  1. केंद्र ने राजोआना की फांसी की सजा बदलने का विरोध किया

  2. पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए केंद्र का रुख

  3. सुप्रीम कोर्ट अब 28 अक्टूबर को मामले की योग्यता पर सुनेगा

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पूर्व पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पंजाब में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राजोआना की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने पर फैसला लेना अनुकूल नहीं होगा। केंद्र के इस रुख के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब वह राजोआना की याचिका पर उसके गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। पीठ में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह भी शामिल हैं।

नटराज ने कहा कि केंद्र को राजोआना की मांग पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि पंजाब में मौजूदा स्थिति को देखते हुए राजोआना की सजा को कम करने के संबंध में कोई निर्णय लेना अनुकूल नहीं होगा।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब जब केंद्र सरकार ने मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने की मांग का विरोध कर दिया है तो अदालत मामले की मेरिट पर सुनवाई करेगी। केंद्र की ओर से मामले की तैयारी के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की।

14 साल से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका

राजोआना की याचिका का मुख्य आधार उसकी दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होना है। राजोआना की ओर से दलील दी गई है कि उसकी दया याचिका वर्ष 2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है।

14 साल से अधिक समय तक फांसी की सजा के अनिश्चित भविष्य में रहने से उसे मानसिक पीड़ा और असहनीय तनाव का सामना करना पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि दया याचिका पर फैसला लेने में इतनी लंबी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।

राजोआना के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उन पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया जाएगा, जिनमें दया याचिका पर अत्यधिक देरी को मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के आधार के रूप में स्वीकार किया गया है। 23 सितंबर को वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राजोआना अब मुख्य रूप से मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के मुद्दे पर जोर दे रहा है।

31 अगस्त 1995 को हुआ था बम विस्फोट

बलवंत सिंह राजोआना को 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए आत्मघाती बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था। इस विस्फोट में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। जांच में राजोआना को मामले में बैकअप बम हमलावर बताया गया था।

विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा। राजोआना को 31 मार्च 2012 को फांसी दी जानी थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से उसकी ओर से दया याचिका दाखिल किए जाने के बाद फांसी पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

2019 में केंद्र ने रखा था सजा कम करने का प्रस्ताव

राजोआना की सजा को लेकर वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने भी पहल की थी। गृह मंत्रालय ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर राजोआना की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सका।

इसके बाद राजोआना ने वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और केंद्र के प्रस्ताव को लागू करने के साथ-साथ उसकी दया याचिका पर फैसला करने की मांग की। इस दौरान केंद्र ने अदालत को बताया था कि मामले में फैसला टाल दिया गया है। दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होने के कारण यह मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है।

पंजाब के मौजूदा माहौल का दिया हवाला

इस बार केंद्र ने राजोआना की सजा कम करने का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। केंद्र का ताजा रुख ऐसे समय आया है जब पंजाब में राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं।

हालांकि, केंद्र ने अदालत के समक्ष मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा कम करने को अनुकूल नहीं बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को केंद्र के विरोध और राजोआना की ओर से सजा में देरी को आधार बनाकर दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई करेगा।