चंडीगढ़/ जालंधर, जेएनएन। कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के बाद कार्यभार तो नहीं संभाला है, ले‍किन वह कांग्रेस की टॉप लीडरशिप से मिलने नई दिल्‍ली पहुंच गए। सिद्धू कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले व अपनी बात रखी। उन्‍होंने स्‍थानीय निकाय विभाग में अपने कामकाज के हिसाब के संग-संग मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के साथ विवाद पर अपना पक्ष भी रखा। बताया जाता है कि सिद्धू को राहुल और प्रियंका से कोई ठोस आश्‍वासन नहीं मिला। इसके बाद सिद्धू पूरे मामले में खाली हाथ लौट आए। पूरी स्थिति के कारण पंजाब कांग्रेस असमंजस और संशय की स्थिति में दिख रही है।

साेमवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने नए ऊर्जा विभाग का चार्ज नहीं संभाला। राजस्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़ व रजिया सुल्ताना ने अपने विभाग की जिम्मेदारी संभाल ली। सिद्धू दिल्ली में राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से मुलाकात कर लौट आए हैं। सिद्धू की यह मुलाकात भी तब हुई, जब राहुल पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए 13 मंत्रियों के विभाग में फेरबदल किया है। इससे कुछ मंत्री काफी खफा हैं, लेकिन सबसे अधिक खफा नवजोत सिंह सिद्धू हैं।

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सिद्धू की राहुल से मुलाकात ने एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राहुल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से नहीं मिल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सिद्धू से मुलाकात की। क्या राहुल यह संदेश देना चाहते थे कि वह सिद्धू के साथ खड़े हैं या सिद्धू यह संकेत दे रहे है कि पार्टी हाईकमान के पास उनकी कितनी पकड़ है।

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क्या होगा मुलाकात का असर
पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि सिद्धू की राहुल से मुलाकात होने पर भले ही मुख्यमंत्री के सेहत पर कोई असर न पड़े, लेकिन जमीनी स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं में एक भ्रम की स्थिति पैदा होगी। ऐसी स्थिति पार्टी के लिए नुकसान हो सकती है। सोमवार को महज दो मंत्रियों की ओर से अपने नए महकमे का कामकाज संभालने को लेकर भी इसी बैठक को जिम्मेदार माना जा रहा है। कुछ नेताओं का कहना है कि सिद्धू के ट्वीट के बाद भ्रम यह पैदा हो गया कि क्या पार्टी हाईकमान कोई हस्तक्षेप करेगा और पुन: विभाग बदले जा सकते है? बता दें कि सोमवार को राजस्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ और ट्रांसपोर्ट मंत्री रजिया सुल्ताना ने ही अपने-अपने विभागों का कामकाज देखा।

सलाहकार ग्रपों से अभी भी बाहर, सोनी के लिए बनाया नया ग्रुप

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी की अगुवाई में मेडिकल एजुकेशन विभाग का एक सलाहकार ग्रुप कायम कर दिया है। अब ग्रुप की गिनती नौ हो गई है और सभी मंत्री इसमें ले लिए गए हैं, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी बाहर हैं। मेडिकल एजुकेशन विभाग के ग्रुप में ओपी सोनी के अलावा स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और लोक निर्माण मंत्री विजय इंद्र सिंगला सदस्य होगे। इसके अलावा कुछ विधायकों और अफसरों को भी इस ग्रुप में लिया गया है। सीएम के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ओपी सोनी की अगुवाई वाला ग्रुप गफलत में छूट गया।

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गुरु की ग्राउंड रिपोर्ट फिफ्टी-फिफ्टी

 दूसरी ओर, मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को नॉन परफॉरमर मिनिस्‍टर कहा तो इस पर काफी चर्चा गम्र हो गई। सिद्धू ने इस पर अपना परफॉरमेंस रिपोर्ट भी जारी किया और मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। कैप्‍टन ने सिद्धू का विभाग बदल दिया और पूरा मामला सुर्खियों में आ गया है। उनसे स्थानीय निकाय विभाग लेकर ऊर्जा विभाग का जिम्मा दिया गया है।

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लोकसभा चुनाव में शहरी इलाकों में हार के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत अन्य मंत्रियों ने भी सिद्धू को जिम्मेदार ठहराया था। इस पर सिद्धू ने कहा था कि वह उनके किए कार्यों की रिपोर्ट आंकड़ों के साथ पेश करेंगे। सिद्धू ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। जागरण ने स्थानीय निकाय मंत्री के तौर पर शहरी इलाकों में किए कार्यों का जायजा लिया , तो पाया कि करीब आधे काम हो चुके हैं और आधे बाकी हैं। पेश है एक बानगी-
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लुधियाना
- ये काम होने थे: सिद्धू ने छह सितंबर 2017 में 3600 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन किया था। इसमें 2500 करोड़ रुपये नहरी पानी को स्वच्छ पानी में बदल कर पीने के लिए प्रयोग में लाया जाना था। सौ करोड़ रुपये की लागत से पक्खोवाल रोड पर आरओबी और आरयूबी तैयार होना था। 60 करोड़ की लागत से बुढ्डा नाला की दोनों तरफ सड़क का निर्माण होना था। 220 करोड़ रुपये फोकल प्वाइंट का विकास होना था। 136 करोड़ रुपये की लागत से शहर की सड़कें बननी थी। 40 करोड़ रुपये में स्टैटिक कंपेक्टर लगने थे। 130 करोड़ रुपये में सीईटीपी का प्रोजेक्ट लगना था। 800 करोड़ रुपये के हलका पूर्व में विकास कार्य होने थे। जगराओं पुल और गर्वमेंट कॉलेज का निर्माण होना था।
-अभी यह है स्थिति: सीईटीपी, जगराओं पुल व गर्वमेंट कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ है। इनकी लागत 168 करोड़ रुपये है।
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अमृतसर
- ये काम होने थे:  सिद्धू ने 6 मार्च, 2019 को रेलवे ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज के काम का शुभारंभ करवाया था। 15 अक्टूबर 2018 को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नींव पत्थर रखा था। 6 मार्च को सिद्धू ने रेलवे फाटक नंबर 22 व वल्ला फाटक पर बनने वाले आरओबी का काम शुरू करवाया। भंडारी पुल को चौड़ा करने के काम को भी हरी झंडी दी। यह तीनों काम 18 माह में पूरे होने हैं। इन पर 81 करोड़ खर्च आना है।
-अभी यह है स्थिति: अभी तक कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है।
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तरनतारन
पिछले दो साल में तरनतारन जिले के विकास के लिए स्थानीय निकाय मंत्री ने कोई राशि जारी नहीं की। उन्होंने कोई घोषणा भी नहीं की।
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गुरदासपुर व रूपनगर
-ये काम होने थे: दीनानगर में सिद्धू ने 17 फरवरी 2019 को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का नींव पत्थर रखा था। यह प्रोजेक्ट 37 करोड़ रुपये से तैयार होना है। प्रोजेक्ट को दो से साल में पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, रूपनगर में 29 अप्रैल, 2017 को पिकांशिया टूरिस्ट कांप्लेक्स की साइट के बारे में टूरिज्म विभाग को आदेश दिए थे।
-अभी यह है स्थिति: दीनानगर में तीन माह भी काम शुरू नहीं हुआ। सीवरेज बोर्ड के एसडीओ दवीतेज विरदी का कहना है कि डीपीआर स्वीकृति के लिए भेजी है। इसके बाद ही टेंडर खुलेगा। रूपनगर में भी कोई काम नहीं हुआ।
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नवांशहर
-ये काम होने थे: सिद्धू ने अमृत योजना के तहत बलाचौर में 17 फरवरी 2019 को 45 करोड़ रुपये की ग्रांट की घोषणा की थी। इसके तहत 23 करोड़ रुपये खर्च होने थे। इसमें से 18 करोड़ रुपये सीवरेज पर, 35 लाख रुपए स्ट्रीट लाइटों पर, 75 लाख रुपये सड़कों पर व 2.75 करोड़ रुपये अन्य कार्यों पर खर्च होने थे। नवांशहर में सीवर की व्यवस्था के लिए 13 करोड़ व राहोंं में सीवरेज की व्यवस्था के लिए 9 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।
-अभी यह है स्थिति: किसी भी प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया।
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पठानकोट
-ये काम होने थे: पठानकोट नगर निगम में दो साल में 15 करोड़ रुपये के काम मंजूर हुए हैं। इनके नींव पत्थर कांग्रेस विधायक अमित विज व मेयर अनिल वासुदेवा ने रखे हैं।
-अभी यह है स्थिति: छह करोड़ के कार्यों का निर्माण चल रहा है। नौ करोड़ के काम अभी धरातल पर नहीं उतरे हैं। विधायक विज का कहना है कि नगर निगम राशि खर्च करने में नाकाम है, जबकि मेयर कहते हैं, सरकार ने घोषणाएं की, लेकिन बजट देना भूल गई।
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होशियारपुर
-ये काम होने थे: फरवरी 2017 में सिद्धू ने विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी।
-अभी यह है स्थिति: अब तक निगम को एक रुपया नहीं मिला है। विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
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कपूरथला
- ये काम होने थे: सुल्तानपुर लोधी में करीब एक करोड़ की लागत से इंटरलॉकिंग टाइल का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट है।
-अभी यह है स्थिति: इंटरलॉकिंग टाइल के दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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संगरूर
-ये काम होने थे: पिछले वर्ष करीब 180 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए घोषित की थी। इसमें से 100 करोड़ रुपये सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च होने थे। 32 करोड़ रुपये भवानीगढ़ में सीवरेज पर खर्च होने थे। बनासर बाग के लिए सात करोड़़ रुपये खर्च किए जाने थे। अजायब घर, बारादरी व शाही समाध का कायाकल्प होना था।
-अभी यह है स्थिति: भवानीगढ़ में सीवरेज का काम हो चुका है। मालेरकोटला में सीवरेज का काम चल रहा है। कुछ प्रोजेक्टों पर काम अभी शुरू नहीं हो पाया है।
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पटियाला
-ये काम होने थे: 2017 से दो करोड़ से पटियाला के सीवरेज की सफाई काम शुरू किया था। 2018 में सिद्धू ने पटियाला को दुनिया के पर्यटन मैप पर लाने की घोषणा की।
-अभी यह है स्थिति: सीवरेज की सफाई काम पूरा हो चुका है। पर्यटन के क्षेत्र में खास काम नहीं हुआ है।
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मोगा
-ये काम होने थे: मोगा में एक रैली में सिद्धू ने 100 करोड़ रुपये नगर निगम को देने का एलान किया था।
-अभी यह है स्थिति: निगम पार्षद गुरप्रीत सिंह सचदेवा की आरटीआइ के अनुसार मार्च 2017 के बाद से निगम को कोई पैसा नहीं मिला है। 100 करोड़ रुपये की ग्रांट भी नहीं आई है।
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फतेहगढ़ साहिब
-ये काम होने थे: पिछले वर्ष 15 जून को उन्होंने आम खास बाग के लिए 5 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। यह राशि जीर्णोद्धार पर खर्च होनी थी।  लाइट एंड साउंड सिस्टम भी लगाया जाना था।
-अभी यह है स्थिति: प्राइवेट कंपनी नाइट फ्रेंक के सहयोग से काम जारी है।
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बरनाला
-ये काम होने थे: सिद्धू ने सीवरेज की समस्या दूर करने के लिए 100 करोड़ रुपये की ग्रांट का एलान किया था।
-अभी यह है स्थिति: प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट जारी नहीं हुई है।
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जालंधर
-जालंधर में सिद्धू ने कोई उद्घाटन नहीं किया। सड़कों, सीवरेज, पानी, पार्कों के जितने भी काम शुरू हुए थे, उसके लिए सीएम ने विधायकों को ग्रांट जारी की थी। सिद्धू ने जालंधर में बिल्डिंग डिपार्टमेंट व बीएंडआर डिपार्टमेंट के अफसरों पर कार्रवाई की। अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई को लेकर सिद्धू को विरोध झेलना पड़ा।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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