चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। बेअदबी कांड की जांच रिपोर्ट को सदन में पेश करने से पूर्व पंजाब सरकार एक और मास्टर स्ट्रोक लगा सकती है। सरकार जांच रिपोर्ट पर होने वाली बहस का सीधा प्रसारण करने की तैयारी में है। ऐसा करके सरकार एक तीर से दो निशाने साध सकती है। जहां आम आदमी पार्टी की हकीकत लोग देख सकेंगे, वहीं अकाली दल का व्यवहार भी जनता के सामने आएगा। रिपोर्ट सदन में सोमवार या मंगलवार को पेश की जा सकती है।

रिपोर्ट पर बहस का लाइव प्रसारण करने की मांग सरकार ने स्पीकर के समक्ष रख दी है, लेकिन अभी यह तय नहीं हो पाया है कि लाइव प्रसारण के लिए किस चैनल को राइट दिए जाएंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रिपोर्ट पर विधायकों को आक्रामक रुख अपनाने के निर्देश तो दिए लेकिन फ्लोर रणनीति को लेकर पत्ते नहीं खोले।

मानसून सत्र भले ही छोटा हो लेकिन कांग्रेस सरकार इसके महत्व को अच्छी तरह समझ रही है। पंजाब भवन में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पूरा फोकस ही बेअदबी कांड पर रिटा. जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पर रखा गया। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने रिपोर्ट को बेहद संजीदा बताते हुए सभी विधायकों को पूरी तैयारी से सदन में पहुंचने के निर्देश दिए।

'ब्लैक शीप' का भी भय सता रहा सरकार को

कांग्रेस सरकार भले ही दो तिहाई के बहुमत से सत्ता में हो और विपक्ष खंडित हो, इसके बावजूद सरकार अपने अंदर के 'ब्लैक शीप' डर सता रहा है। कई विधायक अकाली दल के भी संपर्क में रहते हैं। यही कारण है कि सीएलपी की बैठक में यह मुद्दा उठा कि कुछेक ऐसे लोगों को भी रिपोर्ट पर बहस करने का मौका दिया जाए जो संदेह के घेरे में रहते हैं ताकि उनकी निष्ठा की भी जांच हो जाए।

ये विधायक संभालेंगे मोर्चा

नवजोत सिंह सिद्धू, मनप्रीत सिंह बादल, सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा, अमरिंदर राजा वडि़ंग, कुलजीत सिंह नागरा और कुलदीप सिंह ढिल्लों को अकालियों को घेरने के लिए रिपोर्ट पर बहस का नेतृत्व करने को कहा गया है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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