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चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। बेअदबी कांड को लेकर अभी तक अपने ही विधायकों में घिरी कांग्रेस सरकार मंगलवार को विधान सभा में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को लेकर घिर गई। आप के विधायक अमन अरोड़ा ने कहा, इस पर सरकार के ही अलग-अलग बयान हैंं। एक तरफ विधानसभा में CBI से केस वापस लेने का प्रस्ताव पास हुआ। दूसरी तरफ SIT चीफ CBI को केसों की पुन: जांच करने के लिए पत्र लिख रहे हैंं। क्या SIT चीफ विधानसभा से भी ऊपर हैंं। वहीं, क्लोजर रिपोर्ट को लेकर अकाली दल ने भी नारेबाजी की और बाद में सदन से वाकआउट किया। 

शून्य काल में जब अमन अरोड़ा ने क्लोजर रिपोर्ट का मुद्दा उठाया तो मुख्यमंत्री ने अकेले ही टीम की सरकार की कमान संभाली। मुख्यमंत्री ने जहां बरगाड़ी मामले की जांच में रुकावट डालने और इंसाफ न मिलने के लिए सीधे तौर पर अकालियों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से जनवरी, 2019 में की गई टिप्पणियों के मद्देनजर क्लोजर रिपोर्ट दायर करना CBI के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि CBI ने तो बरगाड़ी केस उससे वापस लेने संबंधी राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने में रुचि दिखाई थी। बाद में अचानक ही क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। यह फैसला अस्पष्ट है। कैप्टन ने सीधे रूप से सुखबीर बादल पर आरोप लगाया कि तत्कालीन राज्य के गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल की हिदायतों पर CBI ने जान-बूझ कर जांच को आगे नहीं बढ़ाया। सदन में अकालियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,'आपके कारण CBI ने जांच नहीं की।' जिस पर अकाली दल के परमिंदर  सिंह ढींढसा ने कहा कि उनकी सरकार ने संत समाज, सिख संगठनों और खुद कांग्रेस के कहने पर केसों को CBI को सौंपा था। वहीं, अकाली दल ने क्लोजर रिपोर्ट के विरोध में वेल में आकर नारेबाजी की और वाकआउट किया। 

बाद में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एडवोकेट जनरल को बरगाड़ी केस में CBI की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने के आदेश दिए हैं, जबकि इससे पहले अमन अरोड़ा ने कहा, तीन चार वर्षों से राज्य की राजनीति बेअदबी कांड को लेकर केंद्रित है। पूर्व सरकार ने केस CBI को दिया। कांग्रेस सरकार ने CBI से केस वापस लेने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवाया। क्या सरकार ने इसकी कोई अधिसूचना जारी की? साथ ही उन्होंने कहा कि SIT चीफ कैसे CBI को जांच पुन: करने का पत्र लिख सकते हैंं। यह विधानसभा का विशेषाधिकार उल्लंघन का मामला है। 

मुख्यमंत्री ने दिया तर्क 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की अदालत ने कहा, 'तत्काल केस में राज्य पुलिस द्वारा एफआईआऱ पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और साल 2015 में जारी किए नोटिफिकेशन में CBI को नोटीफिकेशन में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट एफआईआर के अलावा केस दर्ज करने की आम शक्तियां नहीं हैं। इस कारण नोटिफिकेशन के अमल को वापस लेने की सहमति का सवाल ही नहीं उठता।

दोरजी मामले में जारी हुए नोटीफिकेशनों के संदर्भ में स्पष्ट विभिन्नताएं देखी जा सकती हैं। तत्काल केस में पंजाब की सहमति विशेष रूप से एफआरआइज के सम्बन्ध में थी और वास्तव में जांच एक एजेंसी से दूसरी जांच एजेंसी को तबदील करने तक थी। मौजूदा समय में कोई ऐसा केस नहीं है जोकि अदालत को ऐसी स्थिति की जांच करने के लिए कहा गया है। जहां राज्य ने CBI को अपराधों की एक श्रेणी के मामले में अपने आप केस दर्ज करने के लिए सहमति दी। दूसरी तरफ, वापस लिया नोटिफिकेशन विधानसभा की तरफ के पास किए प्रस्ताव के अनुसार था जो यह स्पष्ट तौर पर दर्शाता है कि CBI को दिए मामलों की जांच वापस लेने की जरूरत है। 

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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