पंजाब में अकाली-दल और बीजेपी एक साथ लड़ेंगे चुनाव? गठबंधन को लेकर क्या बोलीं हरसिमरत कौर?
2027 चुनाव से पहले अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन की चर्चा तेज है। हरसिमरत बादल के संकेत और सुखबीर-मोदी मुलाकात ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
HighLights
हरसिमरत बादल ने अकाली-भाजपा गठबंधन के संकेत दिए।
सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात के बाद चर्चा।
2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण घटनाक्रम।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच फिर राजनीतिक नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई है। अकाली दल की वरिष्ठ नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने संत हरचंद सिंह लोंगोवाला की बरसी पर संगरूर में आयोजित जनसभा के दौरान दोनों दलों के संभावित गठबंधन को लेकर ऐसा संकेत दिया।
जनसभा में लोगों की ओर से कौशल विश्वविद्यालय की मांग रखे जाने पर हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यह अच्छी मांग है और ऐसे छोटे-छोटे काम होते रहते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह बोलते-बोलते चुप कर जाती हैं। लोगों को खुद ही जल्द पता चल जाएगा कि आगे क्या होने वाला है।
हरसिमरत ने आगे संबोधन में कहा-
गुरु साहिब कृपा करके हमें शक्ति और बल दें। ऐसे समझौते हों जैसे पहले दिल्ली से आपके विकास और तरक्की के काम होते थे। एक बार फिर पंजाब में विकास और तरक्की की नींव रखी जाए, जिससे लोगों और पंजाब का भला हो।
सुखबीर की पीएम से मुलाकात के बाद बढ़ी थी चर्चा
हरसिमरत कौर बादल का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद अकाली दल ने संसद के मानसून सत्र में सरकार के विधेयकों का समर्थन करने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच फिर नजदीकी बढ़ने की चर्चा शुरू हुई।
अकाली दल और भाजपा का करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़े। ऐसे में शीर्ष नेताओं के बीच हालिया मुलाकात और हरसिमरत बादल के बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
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अकाली-भाजपा संबंधों का संक्षिप्त इतिहास
अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (पूर्व में जनसंघ) के राजनीतिक रिश्तों की शुरुआत 1952 के पहले आम चुनाव के समय से ही नजर आती है। हालांकि भाषा और वैचारिक दृष्टिकोण को लेकर दोनों के बीच अक्सर मतभेद बने रहे, विशेषकर पंजाबी सूबा आंदोलन के दौर में दोनों दल अलग-अलग राह पर खड़े दिखे।
कालांतर में कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के उद्देश्य से दोनों दल एक-दूसरे के करीब आए। वर्ष 1996 में अकाली दल और भाजपा ने एक ऐतिहासिक व निशर्त गठबंधन की नींव रखी। इसके पश्चात दोनों पक्षों ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े और पंजाब में साझे तौर पर सरकारें भी संचालित कीं।
कृषि कानूनों के मुद्दे पर हुए विवाद के चलते वर्ष 2020 में अकाली दल ने एनडीए (NDA) से अपना नाता तोड़ लिया। इसके बाद 2022 विधानसभा व 2024 लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें अकाली दल व भाजपा दोनों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
अब 6 वर्षों के फासले के बाद दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और हरसिमरत कौर बादल की टिप्पणी ने दोबारा राजनीतिक समझौते की अटकलों को तेज कर दिया है। बहरहाल, नया गठबंधन आकार लेगा या नहीं, इस पर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
