अमृतसर में GNDU का मेन गेट बंद कर स्टूडेंट्स यूनियन का प्रदर्शन, बंदी सिखों की रिहाई की मांग पर लगाए नारे
पंजाब बंद का असर जीएनडीयू और अमृतसर के कई कॉलेजों में दिखा। विद्यार्थियों ने मुख्य द्वार बंद कर प्रदर्शन किया ...और पढ़ें

जीएनडीयू के बाहर बैठे स्टूडेंट्स यूनियनों के सदस्य।
HighLights
जीएनडीयू छात्रों ने पंजाब बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया।
मुख्य द्वार बंद कर बंदी सिखों की रिहाई मांगी।
सरकार से मानवीय आधार पर तत्काल कार्रवाई की अपील।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। पंजाब बंद के आह्वान का असर शुक्रवार को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में भी देखने को मिला। विभिन्न स्टूडेंट्स यूनियनों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर प्रदर्शन किया। यूनियन सदस्यों ने हाथों में पोस्टर लेकर बंदी सिखों की रिहाई की मांग उठाई और सरकार के खिलाफ रोष जताया।
प्रदर्शन के दौरान सदस्यों ने ‘बंदी सिखों को रिहा करो’ के नारे लगाए। यूनियन नेताओं का कहना था कि जिन बंदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उन्हें अब जेल में रखना उचित नहीं है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की।
सथ आर्गेनाइजेशन के प्रधान जसकरण सिंह ने कहा कि सजा पूरी कर चुके बंदियों को अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार से मामले को राजनीतिक नजरिए के बजाय मानवीय आधार पर देखने की अपील की।
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जीएनडीयू के बाहर प्रदर्शन करते हुए स्टूडेंट़्स।
कई कॉलेजों में भी रहा बंद का असर
पंजाब बंद के कारण अमृतसर के कई शिक्षण संस्थानों में भी गतिविधियां प्रभावित रहीं। खालसा विश्वविद्यालय, खालसा कॉलेज, हिंदू कॉलेज, डीएवी कॉलेज और डीएवी कॉलेज आफ एजुकेशन फार वूमेन समेत कई सरकारी और गैर-सरकारी कॉलेज बंद रहे। इन संस्थानों में विद्यार्थियों की आवाजाही भी नहीं हुई।
मुख्य द्वार पर लगाए पोस्टर
जीएनडीयू के मुख्य द्वार पर विद्यार्थियों ने पोस्टर लगाए। प्रदर्शन के दौरान लगातार नारेबाजी होती रही। विद्यार्थियों ने कहा कि सजा पूरी कर चुके बंदियों को लंबे समय तक जेल में रखना उनके साथ अन्याय है। बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने सरकार से सकारात्मक कार्रवाई की अपील की।
