डॉ. रविंद्र मलिक, चंडीगढ़ : करीब 2 करोड़ के सालाना बजट वाले पीयू के हेल्थ सेंटर की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। दोपहर एक से पाच बजे तक ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं बैठता है। करीब 30 हजार स्टूडेंट्स, फैकल्टी मेंबर्स और अन्य कर्मचारियों वाली पीयू में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है। इसको लेकर हेल्थ सेंटर का रियलिटी चैक भी किया गया। इसके चलते मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। हर रोज करीब 30 स्टूडेंट्स बिना इलाज वापस जा रहे हैं। हर रोज दिन में 1 से 5 बजे तक इमरजेंसी में करीब 25 से 30 लोग बिना इलाज वापस जा रहे हैं। स्टूडेंट्स को यही बताया जा रहा है कि इमरजेंसी में कोई नहीं है तो शाम तो ओपीडी में आएं। सेंटर की चार नर्सो में से दो को डेंटल इंस्टीट्यूट में ट्रासफर कर दिया है। बची दो ही काम चलाया जा रहा है। इस वक्त सेंटर में केवल ड्राइवर, सिक्योरिटी और सफाई कर्मी ही होते हैं। डॉक्टर्स के लिए सुविधाएं पूरी, मरीजों के लिए नहीं

रात को इमरजेंसी में जिन डॉक्टर्स की डयूटी लगती है, उनको गेस्ट हाउस में रूकने के लिए एसी, फुली र्फिर्नशड व एलईडी से सुसज्जित कमरा दिया जाता है। इलाज के लिए मरीज हेल्थ सेंटर आते हैें और फिर रात को वो बीमारी की हालत में डॉक्टर वाला गेस्ट हाउस ढूंढते रहते हैं। जो डॉक्टर पीयू के हैं, वो घर से ही रात की इमरजेंसी चलाते हैं।

स्टाफ की कमी के चलते दिक्कत आ रही है। डॉक्टर्स के इंटरव्यू होने हैें। उनकी ज्वाइनिंग के बाद चीजें ठीक हो जाएंगी।

डॉ दविंदर धवन, सीएमओ, पीयू हेल्थ सेंटर

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