चंडीगढ़, [बलवान करिवाल]। अक्टूबर की हल्की बारिश ने ठंडक बढ़ा दी है। यह बारिश ठंडक के साथ धूल और धुएं की चादर से लिपट रहे शहर के लिए खुशहाली लेकर आई है। प्रदूषण से रुक रही सांसों के लिए संजीवनी बन गई है यह बारिश। हवा में तैर रहे पर्टिक्यूलेक्ट मैटर-2.5 और पीएम-10 जैसे प्रदूषित कण जमींदोज हो गए हैं। इससे हवा एकदम से साफ हो गई है। चंडीगढ़ की आबोहवा स्वच्छ हुई है लेकिन पंजाब के अमृतसर में अभी भी पाल्यूशन का स्तर सबसे ज्यादा है।

बीते रविवार से चंडीगढ़ के साथ आसपास के शहर में हो रही बारिश के चलते शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स सोमवार सुबह कम होकर महज 38 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रह गया है। जबकि तीन दिन पहले दशहरे के बाद यह बढ़कर 164 तक पहुंच गया था। इसमें एकदम से इतनी बड़ी गिरावट होने की मुख्य वजह बारिश की बूंदों का प्रभाव ही है। प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब और हरियाणा राज्य सरकार भले ही लाख प्रयास किए जाने का राग अलापती रही हैं। लेकिन ग्राउंड लेवल पर हालात बेहद खराब हैं। खेतों में जमकर पराली जलाई जा रही है।

गैस चैंबर का खतरा टला

पंजाब और हरियाणा के एरिया में बड़े स्तर पर पराली जलाई जा रही है। पराली से निकली रही हजारों टन गैसों से पूरा वातावरण गैस चैंबर में तब्दील होने लगा था। यह धुआं ऊपर नहीं निकल पा रहा था। अब बरसात से ऊपर निकलने का रास्ता खुल गया है। ओजान परत खुलने से अब गैस चैंबर का खतरा टल गया है। अब हवा इसीलिए एकदम साफ हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अब भी पराली जलनी बंद हो जाए तो आगे काफी दिनों तक राहत रहेगी। हालांकि तापमान में गिरावट होने पर यह खतरा और बढ़ेगा। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से एक बार फिर गैस चैंबर जैसी स्थिति बनने लगेगी।

प्रमुख शहरों में प्रदूषण का हाल

शहर            एक्यूआइ

  • चंडीगढ़            38
  • मोहाली            64
  • नई दिल्ली        54
  • फरीदाबाद        69
  • गुरुग्राम            94
  • अंबाला             43
  • कुरुक्षेत्र            39
  • करनाल            33
  • अमृतसर          132
  • जालंधर            76
  • खन्ना                64

Edited By: Ankesh Thakur