चंडीगढ़, [सुमेश ठाकुर]। साइबर क्राइम होने का सबसे बड़ा कारण आसान पासवर्ड है। दस में से चार साइबर क्राइम के केस पासवर्ड क्रेक होने के सामने आ रहे हैं। साइबर क्राइम पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट, स्टेट लीगल सर्विस के सीनियर एडवोकेट और साइबर क्राइम एक्सपर्ट संदीप सूरी ने दो अलग-अलग सर्वे किया। इसमें सामने आया कि 45 प्रतिशत लोग आसान पासवर्ड बनाते हैं, जिसे क्रेक करना हैकर्स के लिए आसान होता है।

ज्यादातर लोग अपना नाम, परिवार के किसी सदस्य का नाम और उसके साथ सिंपल न्यूमेरिक से पासवर्ड क्रिएट करते हैं। यह न्यूमेरिक एक दो तीन, चार पांच छह सात, सात आठ और नौ है। इसके अलावा बहुत से लोग पासवर्ड अपनी डेट ऑफ बर्थ पर रखते हैं, जिसे सोशल मीडिया पर ट्रैक करके फेसबुक, ईमेल सहित हर प्रकार का एप को खोला जा सकता है। फेसबुक पर डेट ऑफ बर्थ के अलावा अपनों के नाम तक होते हैं। जिसे अपराधी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।

अडल्ट के बजाय बच्चे ज्यादा जागरूक

संदीप सूरी ने बताया कि साइबर क्राइम के केस को देखते हुए दो अलग-अलग सर्वे किए। एक सर्वे में 116 बच्चे और दूसरे में 321 अडल्ट शामिल हुए। जिसमें सामने आया कि नौ से 13 साल की उम्र के बच्चे पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर का यूज करते हैं। इसका कारण चाहे कुछ भी हो लेकिन बच्चों के पासवर्ड अडल्ट से ज्यादा सेफ है। वहीं 41 प्रतिशत लोग एक पासवर्ड दो से तीन एप पर इस्तेमाल करते हैं, जिसके चलते उनके बैंक अकाउंट से लेकर फेसबुक, ट्विटर पर निजी जानकारियों को हैक करना आसान हो जाता है। सर्वे में सामने आया है कि 70 प्रतिशत लोग अनजाने में अपने मोबाइल की लोकेशन भी ऑन रखते हैं जिसे हैक करना आसान है।

पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर के साथ दो से तीन महीने में बदलना जरूरी

एडवोकेट संदीप सूरी ने बताया कि साइबर क्राइम से बचने के लिए जरूरी है कि पासवर्ड बनाते समय स्पेशल कैरेक्टर ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा पासवर्ड को दो से तीन महीने में जरूर बदलें। पासवर्ड बदलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बहुत बार मोबाइल इंटरनेट के लिए वाई-फाई का इस्तेमाल किया जाता है। किसी दूसरे का वाई-फाई इस्तेमाल करने से पासवर्ड हैक होने के ज्यादा चांस रहता है।

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