मुख्यमंत्री पंजाब के खिलाफ परगट सिंह का विशेषाधिकार नोटिस, बेअदबी विधेयक पर सदन को गुमराह करने का आरोप
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बेअदबी विरोधी विधेयकों पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है।

पंजाब विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस।
HighLights
परगट सिंह ने सीएम मान को विशेषाधिकार हनन नोटिस भेजा।
बेअदबी विरोधी विधेयक पर गलत जानकारी देने का आरोप।
2016 और 2018 के विधेयकों में अंतर पर सवाल।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पंजाब विधानसभा में गलत जानकारी देने और सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। 22 अक्टूबर को विधानसभा स्पीकर को भेजे गए नोटिस में उन्होंने मुख्यमंत्री से बेअदबी विरोधी कानून से संबंधित विधेयकों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
साथ ही, यदि सदन में गलत जानकारी दिए जाने की पुष्टि होती है तो मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है। परगट सिंह के अनुसार, उन्होंने 13 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री से 2018 के बेअदबी विरोधी विधेयक और इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक के बारे में सवाल पूछा था। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जवाब में 2016 के विधेयक और उस पर राष्ट्रपति की कार्रवाई का हवाला दिया, जबकि सवाल 2018 के विधेयक से संबंधित था।
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2016 और 2018 के विधेयक में अंतर
परगट सिंह ने नोटिस में कहा है कि 2016 और 2018 के विधेयकों के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। उनके अनुसार, 2016 के विधेयक को धर्म के आधार पर सजा के प्रावधानों में असमानता से जुड़े गंभीर संवैधानिक सवालों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2018 में संशोधित विधेयक लाया गया, जिसमें सभी धर्मों के लिए समान सजा का प्रावधान किया गया, ताकि कानून संविधान की भावना और समानता के सिद्धांत के अनुरूप हो।
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अंतर से अनजान होने पर उठाया सवाल
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दिसंबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर 2018 के विधेयक को मंजूरी देने की मांग कर चुके हैं। ऐसे में दोनों विधेयकों के बीच अंतर से अनजान होने का सवाल नहीं उठता। इसके बावजूद 2018 के विधेयक से जुड़े सवाल के जवाब में 2016 के विधेयक का हवाला देना सदन को महत्वपूर्ण विधायी और संवैधानिक तथ्य के बारे में गुमराह करने जैसा है।
परगट सिंह ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मतभेद का मामला नहीं है, बल्कि विधानसभा में सही और तथ्यात्मक जानकारी देने की जिम्मेदारी से जुड़ा है। उन्होंने स्पीकर से मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगने और गलत जानकारी दिए जाने की पुष्टि होने पर मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपने का आग्रह किया है।
