चंडीगढ़, [बलवान करिवाल]। सर्जिकल स्ट्राइक का मतलब यह नहीं कि इसके बाद आतंकवाद खत्म ही हो जाएगा। इसका मकसद पाकिस्तान को करारा जवाब देना था। यह बताना कि आप हमारे सैनिकों पर हमला करोगे तो हम लाइन को क्रॉस कर अंदर तक आकर मारेंगे। सर्जिकल स्ट्राइक से यह समझना कि अब आतंक खत्म हो गया या पाकिस्तान बाज आ जाएगा गलत है। यह कहना है सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका अदा करने वाले ले. जनरल डीएस हुड्डा का।

ले. जनरल डीएस हुड्डा चंडीगढ़ लेक क्लब में आर्मी मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में 'रोल ऑफ क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन एंड सर्जिकल स्ट्राइक' विषय पर व्‍याख्‍यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी आर्मी ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को मारा था। इसका मतलब यह नहीं कि उसके बाद आतंक खत्म हो गया।

उन्‍होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक एक ऑपरेशन था, ऐसे ऑपरेशन समय की मांग के हिसाब से होते रहते हैं। पाकिस्तान ने पठानकोट और उरी में आतंकी हमले किए थे। जिसका जवाब देन के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करना जरूरी हो गया था। यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण सफल ऑपरेशन में से एक था। जिसमें भारतीय सेना के जवान न केवल बॉर्डर पार कर पाकिस्तान के अंदर कई किलोमीटर तक दाखिल हुए। बल्कि लांच पैड ध्वस्त किए 60 से 70 आतंकियों को मारकर वापस भी लौटे और कोई जवान चोटिल नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि आर्मी और देश के नजरिए से यह बहुत बड़ी सफलता थी। जिससे सेना का मनोबल बढ़ा। सेशन के दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण कहां तक ठीक है तो ले. जनरल हुड्डा ने कहा कि यह सेना की बड़ी जीत थी। लोगों तक संदेश पहुंचना ठीक है, लेकिन इसका महिमामंडन ठीक नहीं है।

उन्‍होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से पहले सभी तरह की तैयारी की गई थी। टीम को स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी।अपने आप सर्विलांस जैसी उतनी एडवांस सुविधा नहीं थी। इन सब बातों को देखने के बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला लिया गया।ले. जनरल जेएस चीमा ने कहा कि यह मानना बहुत सरल था कि पाकिस्तान ने अति प्रचारित सर्जिकल हमलों के बाद भारत के खिलाफ कार्रवाई के अपने तरीके पर पुनर्विचार किया होगा।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसे फैसलों से पहले सोचना जरूरी : कर्नल शुक्ला

वहीं कर्नल अजय शुक्ला ने कहा कि यूएसए जैसे देशों में ऐसी स्थित में ग्रेनेड अटैक, मिसाइल से हमले किए जाते हैं। सैनिकों को क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन के लिए भेजना एकदम अंतिम स्टेज होती है। अगर ऐसा किया जाता है तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है, जैसे हमें अपने सैनिकों की जिंदगी की परवाह नहीं है। ऐसे में सर्जिकल स्ट्राइक जैसे फैसलों से पहले सोचना जरूरी है। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक दो बड़े आतंकी हमलों के बाद हुई थी। जिस कारण यह मिलिट्री और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसलिए इसका बार-बार जिक्र किया।