विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जम्मू-कश्मीर: कैबिनेट विस्तार के बाद सवालों के घेरे में सरकार, सियासी चुनौतियों से कैसे पार पाएंगे उमर अब्दुल्ला?

By Naveen SharmaEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 28 Oct 2026 08:58 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उमर कैबिनेट का हुआ विस्तार (जागरण फोटो)

उमर कैबिनेट का हुआ विस्तार (जागरण फोटो)

HighLights

  1. मंत्रिमंडल विस्तार से जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय संतुलन पर सवाल

  2. उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए चुनौतियां और भी बढ़ीं

  3. सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास और प्रभावी प्रशासन की मांग

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो वर्ष बाद मंगलवार को जिस तरह से अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है, उससे पूरे प्रदेश में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

1947 के बाद पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो गया है, जिससे जम्मू और कश्मीर के बीच क्षेत्रीय विवाद उत्पन्न होने का खतरा है।

अपने उदारवादी रुख का प्रदर्शन करने और पहले जम्मू को तीन मंत्री पद देकर उसे प्रतिनिधित्व प्रदान करने के बावजूद उमर अब्दुल्ला अब केवल संकीर्ण क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

उमर सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि मंत्रिमंडल की संरचना पर उठ रहे सवालों का जवाब सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास और प्रभावी प्रशासन के जरिए दिया जाए।

चार नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण और सतीश शर्मा की विदाई के बाद मंत्रिमंडल की नई तस्वीर में जम्मू के मैदानी इलाकों और चिनाब घाटी के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठे हैं।

उमर कैबिनेट में क्षेत्रित अंसतुलन? 

विधानसभा चुनाव के नतीजों में जम्मू और कश्मीर संभाग के बीच स्पष्ट राजनीतिक अंतर दिखाई दिया था। ऐसे में मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन की बहस स्वाभाविक है।

विधानसभा चुनाव में जम्मू के कई क्षेत्रों में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि कश्मीर में नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। जम्मू-सांबा-कठुआ क्षेत्र की 20 सीटों में भाजपा ने 18 सीटें जीतीं, जबकि दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।

ऊधमपुर-रियासी की सात सीटों में भाजपा को छह और नेकां को एक सीट मिली। रामबन-किश्तवाड़ क्षेत्र की आठ सीटों में भाजपा ने चार और नेकां ने दो सीटें जीतीं।

यह भी पढ़ें- पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने कश्मीर पर पारित किया प्रस्ताव, दक्षिण एशिया में शांति का मुद्दा उठा

इसके विपरीत, उत्तरी कश्मीर की 16 सीटों में नेकां ने 11, मध्य कश्मीर की 15 सीटों में 13 और दक्षिण कश्मीर की 16 सीटों में दस सीटें हासिल कीं। ये आंकड़े दोनों संभागों के राजनीतिक रुझान दर्शाते हैं।

विधानसभा में नेकां की ओर से लाए गए स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयान ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है।

सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी कश्मीर में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। क्या उमर कश्मीरी भावनाओं को एकजुट और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं?

वे भाजपा पर धार्मिक आधार पर राजनीति करने का आरोप नहीं लगा सकते, क्योंकि यदि भाजपा ऐसा कर रही है, तो उमर और उनकी पार्टी भी धार्मिक आधार पर ही राजनीति कर रहे हैं। भाजपा और नेकां के बीच धार्मिक तथा क्षेत्रीय राजनीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि, किसी दल की राजनीति को धार्मिक आधार पर केंद्रित बताने के लिए उसके बयानों, नीतियों और फैसलों का ठोस विश्लेषण जरूरी है। दोनों पक्षों के लिए सामाजिक सद्भाव और प्रदेश के सभी क्षेत्रों की आकांक्षाओं को महत्व देना आवश्यक है।

विकास के मोर्चे पर होगी असली परीक्षा जम्मू संभाग में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी अपेक्षाएं बनी हुई हैं। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि संसाधनों का वितरण न्यायसंगत हो और विकास योजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों तक पहुंचे। फिलहाल, मंत्रिमंडल विस्तार ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की बहस को फिर केंद्र में ला दिया है।

स्वायत्तता प्रस्ताव से राजनीतिक बहस तेज

योग्यता या राजनीतिक निष्ठा? मंत्रिमंडल विस्तार के साथ मंत्रियों के चयन की कसौटी पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासनिक क्षमता, अनुभव, चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की क्षमता को पर्याप्त महत्व दिया गया?

मंत्रिमंडल में शामिल एक वरिष्ठ मंत्री की उम्र ही नहीं उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मंत्रिमंडल सहयोगियों को समायोजित करने का मंच नहीं है।

यह भी पढ़ें- मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक्शन में CM उमर, बुलाई कैबिनेट बैठक; दरबार मूव-बर्फबारी समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा