चंडीगढ़ [इन्द्रप्रीत सिंह]। नर्सिंग का कोर्स करके विदेशों में बसने की इच्छुक लड़कियों और उनके अभिभावकों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इस बात से घबराने की जरूरत नहीं है कि उनकी बेटियों को अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। मेडिकल एजुकेशन विभाग ने अपने दो मेडिकल कॉलेजों में चल रहे नर्सिंग के कोर्स में आइलेट्स को शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। अमृतसर और पटियाला के मेडिकल कॉलेज से इसकी शुरुआत होगी।

मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सतीश चंद्रा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि इसकी जरूरत दो माह पहले लगाए गए रोजगार मेले को देखकर लगी। उन्होंने बताया कि विदेश में नर्स के रूप में प्लेसमेंट के लिए 300 में से मात्र आठ लड़कियां ही चुनी गईं। पता चला कि ज्यादातर लड़कियां अंग्रेजी बोलने में नाकाम रहीं जिस कारण उनका चयन नहीं हो सका।

चंद्रा ने बताया कि विदेश में ही नहीं बल्कि भारत जैसे देश में ही नर्सिंग की आज भी भारी मांग है लेकिन इस तरह की दिक्कतें आड़े आ रही हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है। हम इसी साल से नर्सिंग के साथ-साथ दो महीने का आइलेट्स का कोर्स करवाएंगे। साथ ही यह व्यवस्था भी की जाएगी कि पहले साल से ही इसे उनके कोर्स का हिस्सा बना दिया जाए ताकि पढ़ाई के साथ साथ उनकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता बढ़ सके।

आइलेट्स का बड़ा कारोबार

उल्लेखनीय है कि पंजाब में इस समय आइलेट्स का बड़ा कारोबार है। पंजाब के तमाम बड़े और छोटे शहरों में आइलेट्स करके विदेश जाने के इच्छुक युवाओं की लाइनें लगी हुई हैं। कई शहरों का तो हाल यह हो गए हैं कि पूरा बाजार आइलेट्स करवा रहा है।

यह कोर्स करवाने वाले एक बड़े सेंटर के मालिक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनके पूरे पंजाब में कई सेंटर हैं जहां दस हजार स्टूडेंट पढ़ते हैं। इनसे 12 हजार रुपये प्रति माह फीस ली जाती है। यानी 12 करोड़ रुपये प्रति माह का इनका कारोबार है। इस तरह के कई सेंटर युवाओं को आइलेट्स करवा रहे हैं, ताकि वे विदेश में जाकर नौकरी कर सकें-वहां बस सकें।

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Posted By: Kamlesh Bhatt