चंडीगढ़ [इन्द्रप्रीत सिंह]। पंजाब में वर्ष 2012 के मुकाबले भैंसों की संख्या में 23 फीसद की गिरावट आई है, जबकि प्रदेश में दूध की पैदावार बढ़ती जा रही है। सवाल उठता है कि आखिर यह दूध कहां से आ रहा है, क्या मिलावटी दूध लोगों तक पहुंच रहा है? पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ ने ट्वीट करके यह मामला उठाया है। दूध की कितनी पैदावार बढ़ी है, इस बारे में कुछ नहीं कहा है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति भयानक है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि भैंसों की संख्या कम हुई है, जबकि 2012 के मुकाबले गायों की संख्या दो फीसद बढ़ी है। उन्होंने कहा कि दुधारू पशुओं को न रखने के कई कारण हो सकते हैं। विभाग के डायरेक्टर डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने भी माना कि भैंसों की संख्या में काफी कमी आ रही है। सर्वे करवाया जा रहा है, लेकिन जो ट्रेंड सामने दिखाई दे रहे हैं वह इसी प्रकार के हैं।

इन्द्रजीत कहते हैैं कि भैंसों समेत दुधारू पशुओं को रखने में लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादकों को दूध की सही कीमत नहीं मिल रही है। साथ ही यूरोपियन यूनियन और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने भारत में सस्ते दामों में सूखा दूध उतार दिया है। दूध के लिए भैंसों आदि को रखना अब महंगा पडऩे लगा है।

डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने माना कि बाजार में मिलावटी दूध भी आ रहा है और नियम सख्त न होने के कारण मिलावट करने वालों में कोई डर नहीं है। उनके विभाग ने कई जगह छापामारी की और नकली दूध बनाने वालों को पकड़ा। तंदरुस्त पंजाब मिशन के डायरेक्टर काहन सिंह पन्नू ने भी दूध और नकली देसी घी बनाने वालों को पकड़ा, इसके बावजूद दूध बाजारों में सरेआम बिक रहा है।

1992 में 51.23 लाख भैैंसें थीं

पंजाब में 1992 में भैंसों की संख्या 51.23 लाख थी जो 2012 में कम होकर 46.26 लाख पर आ गई। यह दस फीसद की कमी दो दशकों में थी, लेकिन अब 2022 की जनगणना के लिए जो डाटा तैयार किया जा रहा है उसमें 23 फीसद की कमी के ट्रेंड दिखाई पड़ रहे हैं।

लोगों को जागरूक करने की जरूरत : अजयवीर जाखड़

पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ ने कहा कि आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर को मजबूत करके किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। यह तभी होगा अगर उन्हें उनके उत्पादन के दाम सही मिलेंगे और आम लोगों को क्वालिटी वाला दूध मिलेगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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