चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। Punjab Scholarship Scam: पंजाब में दलित विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप में हुए घोटाले की जांच  अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। सीबीआइ ने पंजाब सरकार से पोस्ट मैट्रिक से संबंधित दस्तावेज मांग लिए हैं। वहीं, पेंच इस बात को लेकर फंस गया है कि क्या सीबीआइ पंजाब में बगैर राज्‍य सरकार के इजाजत से जांच कर सकती है। इस संबंध में पंजाब सरकार ने विधानसभा में विधेयक पास किया हुआ है।

इस बीच केंद्रीय सामाजिक अधिकारिता व न्याय मंत्रालय के कहने पर अब 63.91 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआइ करेगी। वहीं, इस घोटाले में नए तथ्य निकल कर सामने आए है कि पंजाब सरकार ने इस मामले में अभी तक अधिकारिक रूप से कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को क्लीन चिट नहीं दी है।

लेकिन बड़ा पेंच, पंजाब सरकार की सहमति के बिना सीबीआई नहीं दे सकती है राज्य में दखल

करीब एक वर्ष के बाद न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप सीबीआइ को जांच सौंप दी है। 63.91 करोड़ रुपये के इस घोटाले में सीबीआई जांच शुरू होने को लेकर पंजाब सरकार की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पिछले वर्ष ही पंजाब सरकार ने विधान सभा में बिल पास किया था कि सीबीआइ सरकार की मर्जी के बिना किसी भी मामले में जांच नहीं कर सकती है।

वहीं, घोटाले को लेकर कुछ नए तथ्य भी सामने आने लगे है. घोटाले को लेकर पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय एससी आयोग को कहा है कि इस मामले में कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को क्लीनचिट नहीं दी गई है. वहीं, आयोग पंजाब सरकार से एडीशनल चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट व तीन आईएएस अधिकारियों द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट मांग रहा है लेकिन सरकार ने अभी तक यह रिपोर्ट आयोग को नहीं सौंपी है.

आयोग के चेयरमैन विजय सांपला का कहना है. पंजाब सरकार बार-बार मांगने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी कह रहे हैं कि सरकार ने अभी तक कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को क्लीनचिट नहीं दी है। पंजाब के अधिकारियों ने आयोग को बताया है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। हालांकि आयोग के सामने अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब जांच पूरी नहीं हुई तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंत्री को क्लीनचिट कैसे दे दी।

वहीं, अब यह मामला सीबीआइ के पास जाने से पंजाब सरकार की परेशानी बढ़ सकती है। यह केंद्रीय योजना है और फंड भी केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाता है। जानकारी के अनुसार सीबीआइ ने पंजाब सरकार से घोटाले के संबंध में दस्तावेजों की भी मांग कर ली है। सीबीआइ पहले भी हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में हुए घोटाले की जांच कर रही है। पंजाब में हुए पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाले की जांच सीबीआई को जाने के साथ ही पंजाब की दलित राजनीति में उछाल आना शुरू हो गया है।

बता दें कि पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप घोटाल का मामला अगस्त 2020 में तब सामने आया था जब विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी कृपा शंकर सरोज ने अपनी एक रिपोर्ट चीफ सेक्रेटरी को सौंपी थी। ‘दैनिक जागरण’ ने इस घोटाले पर से पर्दा हटाया था। एसीएस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए 303 करोड़ रुपये के फंड में 63.91 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसमें कैबिनेट मंत्री साधू सिंह धर्मसोत के भी संलिप्त होने के आरोप थे।

दरअसल विभाग का जिन शिक्षण संस्थाओं से 8 करोड़ रुपये की रिकवरी करनी थी, उन्हीं संस्थाओं को रिकवरी किए बगैर 16.91 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया गया था। वहीं, 39 करोड़ रुपये का भुगतान वह था, जिसका सरकार के पास रिकार्ड नहीं था।

63.91 करोड़ रुपये के इस घोटाले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन को इसकी जांच सौंपी थी। चीफ सेक्रेटरी ने तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की टीम गठित कर इसकी जांच करवाई थी। हालांकि इस रिपोर्ट को उजागर नहीं किया गया लेकिन मुख्यमंत्री साधू सिंह धर्मसोत को क्लीनचिट दे दी थी।

Edited By: Sunil Kumar Jha